
देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरों के बीच गरीब-मजदूरों के सामने खाने की परेशानी बढ़ती जा रही है. ऐसे में देश के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र की मोदी सरकार से अधिक गेहूं उपलब्ध कराने की मांग की है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी केंद्र सरकार से गेहूं की डिमांड की है. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी केंद्र सरकार से अनाज वितरण करने की मांग लगातार कर रहे हैं.
कोरोना वायरस की महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए देश के तमाम राज्यों ने अपने संसाधन पूरी तरह से झोंक दिए हैं. लॉकडाउन के चलते गरीब-मजदूरों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. लॉकडाउन की वजह से एक तरफ जहां कारोबार पूरी तरह से ठप होने से उनकी कमाई बंद है तो दूसरी तरफ उनको खाने की किल्लत हो रही है. ऐसे में राशन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को लॉकडाउन के दौरान लोगों की राशन की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र से राज्य को अधिक गेहूं जारी करने के लिए कहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) गेहूं के भंडार से भरा है. लॉकडाउन के दौरान राशन की मांग बढ़ गई है, क्योंकि बड़ी संख्या में परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित किए जाने वाले गेहूं ले रहे हैं.
सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से और गेहूं जारी करने का अनुरोध किया है, ताकि कोई भी इस संकट के दौरान भूखा न सोए. उन्होंने कहा कि एफसीआई के भंडार गेहूं से भरे हैं और नई फसल भी तैयार है. इस स्थिति में मुझे केंद्र सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है और जल्द ही राज्यों को राशन के लिए अधिक गेहूं जारी किया जाएगा. राज्य सरकार तब तक वंचितों को हर संभव मदद देगी, जब तक अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आती.
अशोक गहलोत के सुर में सुर मिलाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी मंगलवार को केंद्र से गेहूं की डिमांड की है. उद्धव ने कहा कि महाराष्ट्र में 80 प्रतिशत गरीबों को रियायती खाद्य सामग्री मिल चुकी है. उन्होंने कहा कि केंद्र केवल चावल मुफ्त में दे रहा है, लेकिन हमने केंद्र से गेहूं और दाल की भी मांग की है ताकि आपूर्ति होने पर हम जरूरतमंद लोगों तक इसे पहुंचा सकें.
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अनाज वितरण के लिए नियमों को सरल करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि जिसके पास राशन कार्ड नहीं है, उसे भी अनाज देने के लिए नियमों में छूट दी जाए. गर्मी बढ़ने के साथ तैयार खाना जल्द खराब होगा, इसीलिए जरूरतमंदों को अनाज देना बेहतर होगा. ऐसे में चावल के साथ गेहूं भी सरकार उपलब्ध कराए और दाल भी दे ताकि अनाज वितरण हो सके.
गहलोत और उद्धव ठाकरे से पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी मोदी सरकार से अनाज वितरण की मांग उठा चुके हैं. राहुल ने कहा था कि देश के गोदामों में अनाज सड़ रहा है और लाखों लोग भूखे पेट इंतजार कर रहे हैं. इस संकट के वक्त में ये अमानवीय है. इस संकट में आपातकाल राशन कार्ड जारी किए जाएं. ये उन सभी के लिए हो, जो इस लॉकडाउन में अन्न की कमी से जूझ रहे हैं.
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