मशहूर शायर राहत इंदौरी का दिल का दौरा पड़ने से 70 साल की उम्र में निधन हो गया है. इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में उनका कोरोना का इलाज भी चल रहा था. 


खास बातें

70 साल की उम्र में राहत इंदौरी का कोरोना संक्रमण से निधन


इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में चल रहा था राहत इंदौरी का इलाज


राहत इंदौरी ने खुद ही ट्वीट करके अपने कोरोना संक्रमण की जानकारी दी थी


इंदौर : मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) का दिल का दौरा पड़ने से 70 साल की उम्र में निधन हो गया है. इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में उनका कोरोना का इलाज भी चल रहा था. कोरोना से संक्रमित पाए जाने के बाद उन्हें अरबिंदो अस्पताल में थे भर्ती कराया गया था. राहत इंदौरी ने खुद मंगलवार सुबह खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी. जानिये राहत कुरैशी कैसे बन गए राहत इंदौरी, उनसे जुड़ी कई अनसुनी बातें  

- राहत इंदौरी का मूल नाम राहत कुरैशी था. इंदौर शहर का निवासी होने की वजह से उन्होंने इसे अपने नाम का हिस्सा बना लिया. 
- उनके पिता रफतुल्ला कुरैशी एक कपड़ा मिल में मजदूर थे और माता मकबूल उन निसा बेगम गृहिणी थी. 
- राहत इंदौरी की स्कूल से स्नातक की पढ़ाई इंदौर में और स्नातकोत्तर की पढ़ाई भोपाल में हुई.
- राहत इंदौरी ने मध्य प्रदेश की भोज यूनिवर्सिटी के उर्दू साहित्य में पीएचडी किया. 
- वे पिछले 45 सालों से मुशायरे और कवि सम्मेलनों की जान बने हुए थे. 
- उनकी लोकप्रियता दुनिया के तमाम देशों में थी और वे कई देशों में जा चुके थे. 
- वे कवि सम्मेलनों के साथ ही बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी संगीत दे चुके थे. 
- राहत इंदौरी पुरानी पीढ़ी के साथ ही नई जनरेशन में भी प्रसिद्ध थे. 
- उनकी कविता 'बुलाती है मगर जाने का नहीं' टिकटॉक पर बहुत वायरल हुई थी.
- वे शायर होने के साथ ही एक अच्छे पेंटर भी थे.