राजस्थान जोधपुर के देचू में एक खेत में 11 पाक विस्तापित लोगों के आत्महत्या में करने के मामले में मृतक लक्ष्मी का मरने से पहले का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मृतक लक्ष्मी वायरल वीडियो में 11 लोगों के आत्महत्या करने की वजह बता रही है। इस वीडियो में लक्ष्मी ने कहा, ''मैं भील जाति से हूं और मेरे पिता बुद्धाराम हैं। रहने वाले भारत के ही, लेकिन कर्मों के कारण पाकिस्तान पहुंच गए। वहां से अपनी जिंदगियां बचाने के लिए 2015 में जोधपुर आ गए। आंगणवा की बस्ती में आशियाना बसाया। भाइयों के ससुराल पक्ष और अपने भी इसी बस्ती में रहते थे तो उम्मीद थी कि अपनों के बीच जिंदगी अब आसानी से जी सकेंगे। हम भारत के कानून, सिस्टम और गली तक को नहीं जानते थे। जिंदगियां संकट में थी, बचाने के लिए भागे, अपने देश में अपनों के बीच सुखी रहने के लिए आ गए।'
लक्ष्मी ने वायरल वीडियो में कहीं ये बातें
मेरी जिंदगी की कहानी संगीन है। इसे मैंने अपनी डायरी में लिखा। अब इतना समय नहीं है कि पूरी डायरी पढ़ कर बता सकूं। इस शॉर्ट वीडियो में अपनी जिंदगी की कहानी बताना चाहती हूं। सीधे-साधे व नेक इंसान की बेटी हूं। पाकिस्तान में सभी लोग गलत नहीं हैं, लेकिन वहां भी कुछ ऐसी कंपनियां हैं, ऐसे लोग रहते हैं, जो इंसान के दुश्मन हैं। वो चैन से नहीं जीने देते। गरीब के बच्चे पढ़ नहीं सके, आगे नहीं बढ़ सके, गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं। ये खतरनाक कंपनियां अच्छे लोगों के पीछे पड़ जाती हैं।
जब छोटी थी, तभी से ये कंपनियां मेरे पीछे लग गई थी। अपना धर्म बचाने के लिए मैं जागरूक थी। पढ़-लिखकर अपने देश में रहने का सपना देखा तो कंपनी ने इस सपने को तोड़ने की ठान ली। बहुत दु:ख दिए। वहां के जागीरदार व एक पार्टी ने हमारा साथ दिया। हम मौत के मुंह से बचकर आ गए। दो साल पहले मेरी एक छोटी बहन ने यातनाओं के कारण 2017 में यहां दम तोड़ दिया।
पहले ही दबे और कुचले हुए थे, जैसे-तैसे जोधपुर पहुंचे थे और पहले ही दिन से भाई के ससुराल पक्ष ने हमले और अत्याचार शुरू कर दिए। पाकिस्तान की तरह यातनाएं देने की कोशिश। रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम लिखवाए हैं, उन्होंने भगत की कोठी से ही हम बहनों को गायब करवाने की कोशिश की। शादी व रिश्तों के बहाने अपनापन दिखाकर इन लोगों ने हम बहनों को बेचने की कोशिश की।
इनके तौर तरीके से समझ में आ गया कि यहां अपने भी धोखा देने में लगे हैं। जब जोधपुर आ गए थे तो पाकिस्तान में भाई को गिरफ्तार करवा दिया था। एक वकील साहब ने पाकिस्तान छोड़ते समय आगाह किया था कि गैंग वहां भी परेशान करेगी, ध्यान रखना। हमने उनकी बात पर गौर नहीं किया, लेकिन भाई के ससुराल पक्ष की हरकतों ने वो सलाह याद दिला दी। इनका मकसद हमें बेचना ही था, बर्बाद करना था।
प्रताड़ना की जानकारी हमने हमारे गारंटर सुनील को बताई तो उन्होंने भी चुप रहने की हिदायत दी। अपहरण के प्रयास हुए, दूसरे लोग भी इस गैंग का ही साथ दे रहे थे। मंडोर पुलिस से मदद मांगी तो पुलिस ने भी हमें ही डांटा। कहते, यहां लड़ने आए हो। यहां से भागकर ट्यूबवेल पर रहने लगे। वहां भी उनके लोग पहुंच गए। हद पार परेशान करने लगे। पुलिस को शिकायत दी, आईजी को बताया। सहायता मांगी। सुरक्षा मांगी। इस पर कोई सहायता नहीं मिली। महिला थाने में हमारे खिलाफ मुकदमा करवा दिया गया। पुलिस को पूरी बात बताई, सबूत दिए, लेकिन नहीं सुना और मुझे पाबंद कर दिया। इसके बाद भाभी से रिश्ता तोड़ दिया। फिर भी इन लोगों ने पीछा नहीं छोड़ा। मंडोर थाने में मैंने रिपोर्ट दी, उस पर भी कार्रवाई नहीं की। इसमें भी मुझे ही पाबंद कर दिया।
पुलिस परेशान करने लगी। डिप्टी साहब तक ने धमकाया, चुप रहो नहीं तो वापस पाकिस्तान भेज देंगे। धमकियां सहन करती रही। बाद में एसपी, कलेक्टर को आपबीती बताई। मुख्यमंत्री, गृहमंत्री तक ज्ञापन भेजे। फरवरी 2020 में प्रधानमंत्री कार्यालय तक जाकर अपनी शिकायत दी। मेरी संपर्क पोर्टल व पुलिस में दी शिकायत पर मुझे 29 जुलाई को मंडोर थाने बुलाया गया। पुलिसवालों ने बड़ी शराफत से बात की, शिकायत पूछी। वहां लेडी कांस्टेबल दुर्गा को मैंने अपनी पूरी बात, सारे सबूत, डायरी, फोन, सबकुछ दिखाया। मुझसे सभी सबूत लेने की जगह छीनने की कोशिश की।
बच्चा जहन मेरे साथ था। उसके हाथ में ये देकर उसे भगा दिया। मुझे पकड़ लिया। दुर्गा मैडम ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि मैंने उससे मारपीट की है। अंदर बंद कर दिया। मेरी बहनों ने लोगों को फोन कर जानकारी दी कि मुझे पुलिस ने पकड़ लिया है। मुझे डरा-धमका कर पहले की गई शिकायतों पर चुप रहने को कहा। थाने के सवाई ने भी बुरा-भला कहा। जबरन साइन करवाए। हिंदी में लिखा, जो मुझे आती नहीं। अंग्रेजी व उर्दू में भी साइन करवाए। मेरे साथ छल हुआ। सभी ने मिलकर धोखा किया। मेरी बहन ने एक डॉक्टर से फोन करवाया। थाने में इंजेक्शन तक लगाया और हंसकर बोली, अब इसका इलाज हो गया है। इसे छोड़ दो। इसके बाद रात आठ बजे कलेक्ट्रेट में सर प्रताप की मूर्ति के पास छोड़ दिया। दयाल, जिसे लक्ष्मी डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करना चाहती थी।
देचू पुलिस ने भी बुलाकर एक बार प्रताड़ित किया था। शरीफा ने गैंग के माध्यम से ही मेरे भाई पर दबाव बनाकर शादी की थी। हमें भी दूसरे लोगों के यहां शादी करवा कर बर्बाद करना चाहते थे। भगवा लिबास में दो आदमी भेजे गए थे। हमें टोना-टोटका के नाम पर डराने आए थे। पाकिस्तान से ही आए डॉ. भागचंद मेरी मदद के नाम पर सहानुभूति जता रहे थे, लेकिन वे भी उसी गैंग में जुड़ गए थे। नाथड़ाऊ की टीकू बाई को हमें शादी के झांसे में लाने का काम सौंपा गया था। वह हमारे घर भी आई थी। रिश्ता देने को भी हम तैयार हो गए थे, लेकिन जब टीकू के भाई की सास के इशारे पर काम करने का पता चला तो हमें समझ आ गया।
गंगाराम नामक व्यक्ति ने भी हमसे छल करने की कोशिश की। हर किसी ने मुझसे पैसे लिए, शिकायत लिखने, थाने में दर्ज करवाने, आगे पहुंचाने के नाम पर ठगते गए। गांव में लोगों ने पहले सहारा दिया, बाद में वे भी दु:ख देने लगे। अब मुझे ये हैरत हो रही है कि पाकिस्तान के कुछ लोगों के कारण मैं बचकर यहां तक पहुंची लेकिन यहां कुछ लोगों ने वहां की गैंग के साथ मिलकर हमारे खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया।
दोनों भाई, जुड़वां हैं, भोले हैं। मैं बड़ी थी। 10 साल की थी तब से लड़ती आ रही हूं। इतने लोगों ने तीनों बहनों को सताया। गैरों से ज्यादा अपने हमें बर्बाद करने में लग गए। मेरी यह डायरी सही हाथों में पहुंची तो बहुत से परिवारों की जिंदगी बच जाएगी। अब ईश्वर ही हमारी अंतिम जगह है। वहीं की यात्रा करनी है। सभी जहां जाते हैं, मजबूरन हमें भी वहीं जाना पड़ा है।
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