महाभारत में भीम सबसे शक्तिशाली पात्र थे। वो जब अपना गदा उठता था तो धरती काँप उठती थी, अपने एक प्रहार से भीम दुश्मन को धूल चटा देते थे लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि पांडव पुत्र भीम को एक अज़गर ने तारे दिखा दिए थे। भीम जो बेहद ताकतवार माने जाते है, उनमे 10 हजार हाथियों के समान बल था। वो एक अजगर के सामने बेबस हो गए थे। अजगर ने भीम को कसकर जकड लिया और भीम अपनी सुध -बुध खो बैठे और बिहोश हो गए।
इसी दौरान युधिष्ठिर वहां भीम को ढूंढते हुए पहुंचे तो अजगर से पूछा कि क्या आप कोई देव है क्योकिं कोई साधारण प्राणी भीम को इस तरह जकड़ नहीं सकता उसमे इतनी क्षमता नहीं है। उस अजगर ने युधिष्ठिर से कहा कि मैं तुम्हारा ही पूर्वज हूं। मेरा नाम नहुष है। मैंने बहुत से यज्ञ किए है जिस कारण मैं इतना शक्तिशाली हो गया था और मुझे स्वर्ग का इंद्र बना दिया गया। इस बात से मुझे अहंकार हुआ और मैंने अपनी पालकी सप्तऋषियों से उठवाई और अगस्त्य ऋषि का भी मैंने बहुत अपमान किया है जिसके कारण उन्होंने मुझे अजगर बनने का श्राप दिया। जब मुझे अपनी भूल का अहसास हुआ तो मैंने उनसे माफ़ी मांगी।
उस समय अगस्त्य ऋषि ने कहा कि जब कोई व्यक्ति आ कर तुम्हारे प्रश्नों का सही उत्तर देगा तब तुम इस श्राप से मुक्त हो जाओगे। पहले अवतार में फिर से आजाओगे। अगस्त्य ने उन्हें यह भी वरदान किया कि जब तुम अजगर बन कर रहोगे तब यदि कोई तुमसे बलवान व्यक्ति भी तुम्हे मिलता है तो तुम्हारे सामने उसकी शक्ति खत्म हो जायेगी।
इस पर युधिष्ठिर ने कहा कि कृपा कर के मेरे भाई को छोड़ दीजिए मैं आपके प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हूं। युधिष्ठिर की बात सुनकर अजगर ने अपना प्रश्न पूछा और युधिष्ठिर सभी प्रश्न के उत्तर दिया और अज़गर उसके सारे प्रश्न से खुश था। इसके बाद उसने भीम को छोड़ दिया और उसे भी अपने श्राप से मुक्ति मिल गई।
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