बजरंगबली ने शनिदेव को रावण के चंगुल से आज़ाद कराया था | आइये जानते हैं पूरी घटना के बारे में |
जब रावण के पुत्र का जन्म होने वाला था, उस समय रावण ने समस्त ग्रहों को कुंडली के ग्यारहवें स्थान में बांध दिया था | लेकिन शनिदेव ने अपना एक पैर कुंडली के बारहवे स्थान में रख दिया और इसी कारण रावण का पुत्र चिरंजीवी न हो सका | गुस्से में लंकापति रावण ने गदा से प्रहार करके शनिदेव का एक पैर तोड़ दिया और उन्हें लंका में ही बंदी बना लिया |
जब भगवान राम का सन्देश लेकर हनुमान जी देवी सीता के पास अशोक वाटिका पहुंचे, तो उन्होंने शनिदेव को आज़ाद कराकर आकाश में दूर फेंक दिया था | वहां से शनिदेव सीधा आकर मध्यप्रदेश के एती गाँव में गिरे थे |
शनिदेव ने बजरंगबली को वचन दिया था कि वे लंका को भस्म करने में हनुमान की सहायता करेंगे | शनिदेव ने इसी स्थान से लंका पर वक्री दृष्टि डाली थी, जिसके पश्चात पूरी लंका भस्म हो गयी थी | आज भी इस स्थान पर शनिदेव का भव्य मंदिर मौजूद है, जिसका जीर्णोद्धार राजा विक्रमादित्य ने किया था |
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