आज कल के समय जब कोई किसी की बेवजह मदद करना पसंद नहीं करता ऐसे समय में कभी कभार हम किसी ऐसी घटना से परिचित हो जाते है जिसे जानकर हमारा मानवता और इंसानियत पर विश्वास और बढ़ जाता है। ऐसी एक घटना सूरत में घटी जिसे जानने के बाद हर कोई ये मानने को तैयार है कि मानवता और इंसानियत अभी भी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है। दरअसल ट्रैफ़िक रोड ब्रिगेड (टीआरबी) के एक कर्मचारी ने एक ऐसे आदिवासी लड़के की मदद की जो पैसे कमाने और एक मोबाइल फोन खरीदने के लिए अपने घर डांग जिले के अहवा से सूरत तक पहुंचा गया था। पैसे कमाने के लालच से सूरत आया ये लड़का कई दिनों से इस शहर में भूखे और प्यासे भटक रहा था। इस टीआरबी के कर्मचारी ने ना सिर्फ उस लड़के की मदद की, उसे खाना खिलाया बल्कि उसे सही सलामत उसके घर भी भेज दिया। मूलतः नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रांत के अचम जिले के एक आप्रवासी लक्ष्मण नेपाली शुक्रवार को सूरत के माजुरा गेट चौराहे पर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। उसी […]
आज कल के समय जब कोई किसी की बेवजह मदद करना पसंद नहीं करता ऐसे समय में कभी कभार हम किसी ऐसी घटना से परिचित हो जाते है जिसे जानकर हमारा मानवता और इंसानियत पर विश्वास और बढ़ जाता है। ऐसी एक घटना सूरत में घटी जिसे जानने के बाद हर कोई ये मानने को तैयार है कि मानवता और इंसानियत अभी भी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है। दरअसल ट्रैफ़िक रोड ब्रिगेड (टीआरबी) के एक कर्मचारी ने एक ऐसे आदिवासी लड़के की मदद की जो पैसे कमाने और एक मोबाइल फोन खरीदने के लिए अपने घर डांग जिले के अहवा से सूरत तक पहुंचा गया था। पैसे कमाने के लालच से सूरत आया ये लड़का कई दिनों से इस शहर में भूखे और प्यासे भटक रहा था। इस टीआरबी के कर्मचारी ने ना सिर्फ उस लड़के की मदद की, उसे खाना खिलाया बल्कि उसे सही सलामत उसके घर भी भेज दिया। मूलतः नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रांत के अचम जिले के एक आप्रवासी लक्ष्मण नेपाली शुक्रवार को सूरत के माजुरा गेट चौराहे पर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। उसी […]
आज कल के समय जब कोई किसी की बेवजह मदद करना पसंद नहीं करता ऐसे समय में कभी कभार हम किसी ऐसी घटना से परिचित हो जाते है जिसे जानकर हमारा मानवता और इंसानियत पर विश्वास और बढ़ जाता है। ऐसी एक घटना सूरत में घटी जिसे जानने के बाद हर कोई ये मानने को तैयार है कि मानवता और इंसानियत अभी भी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है। दरअसल ट्रैफ़िक रोड ब्रिगेड (टीआरबी) के एक कर्मचारी ने एक ऐसे आदिवासी लड़के की मदद की जो पैसे कमाने और एक मोबाइल फोन खरीदने के लिए अपने घर डांग जिले के अहवा से सूरत तक पहुंचा गया था। पैसे कमाने के लालच से सूरत आया ये लड़का कई दिनों से इस शहर में भूखे और प्यासे भटक रहा था। इस टीआरबी के कर्मचारी ने ना सिर्फ उस लड़के की मदद की, उसे खाना खिलाया बल्कि उसे सही सलामत उसके घर भी भेज दिया।
मूलतः नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रांत के अचम जिले के एक आप्रवासी लक्ष्मण नेपाली शुक्रवार को सूरत के माजुरा गेट चौराहे पर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। उसी समय लक्ष्मण ने एक लड़के को कुछ लोगों से कुछ खाने के लिए भीख मांगते हुए देखा। मुख्य रूप से गुजरात के आदिवासी जिले डांग में स्थित अहवा निवासी 19 वर्षीय युवक सूरज भोई 25 सितंबर को सुबह बिना किसी को बताए घर से निकलने के बाद सूरत पहुंचा था। सूरत आने के बारे में सूरज ने कहा कि वह एक मोबाइल फोन चाहता था और चूंकि उनका परिवार गरीब था, उन्होंने दक्षिणी गुजरात के सबसे बड़े शहर में जाने और खुद से ही मोबाइल खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे कमाने का फैसला किया था।
हालाँकि यहाँ आने के बाद से वह पूरा दिन भूखा रहा साथ ही किसी मदद की तलाश में 10 किमी से अधिक पैदल चला। शुक्र है कि लक्ष्मण नेपाली ने इसकी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने इस लड़के को खिलाया और फिर उसे बस स्टैंड तक पहुँचाकर उसके घर आहवा वापस जाने के लिए टिकेट भी खरीद कर उस लड़के को दिया। साथ ही उन्होंने बस में बैठे लोगों से भी उस लड़के की मदद करने की बात कही। इस पूरी प्रक्रिया में फ्रेंड्स फॉर वीमेन एंड चिल्ड्रन (FFWC) के पुलिस स्वयंसेवकों ने लक्ष्मण की मदद की।
37 वर्षीय लक्ष्मण नेपाली के इस काम की तारीफ हर कोई कर रहा है। सूरत पुलिस के अधिकारी भी इस बात से बहुत खुश है। सूरत ट्रैफिक के डीसीपी प्रशांत सुम्बे ने कहा, “सूरत पुलिस ने खोए हुए, बुजुर्गों और बच्चों की मदद करने की पहल को बहुत गंभीरता से लिया है और इस पहल के मोर्चे पर टीआरबी के जवान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। आने वाले दिनों में हम नेपाली के अच्छे काम की सराहना करेंगे।”
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