जानिए हाथरस गैंगरेप केस का पूरा घटनाक्रम, जिसने एक बार फिर ताजा किए दिल्ली निर्भया केस के जख्म

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 19 वर्षीय दलित युवती के साथ हुई दरिंदगी ने एक बार फिर पूरे देश को झगझोर कर रख दिया है। इस घटना ने एक बार फिर 2012 के दिल्ली निर्भया गैंगरेप की याद दिला दी है। निर्भया की तरह ही हाथरस पीड़िता के साथ भी दरिंदों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी जिस वजह से आज वह हमारे बीच नहीं है। हाथरस की निर्भया को न्याय दिलाने के लिए इस समय सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच पीड़िता का जबरन अंतिम संस्कार कराने को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी कटघरे में खड़ी है।


पीड़िता के लिए न्याय की मांग

हाथरस गैंगरेप कांड के बाद सोशल मीडिया पर सभी वर्ग के लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया है। राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक, लोगों ने पीड़िता के लिए शीघ्र न्याय की मांग की है। बता दें कि यह घटना 14 सितंबर को हुई थी। पीड़िता के परिवार के मुताबिक, वह अपनी मां और भाई के साथ खेत में घास काट रही थी। उसका भाई घास के एक बंडल के साथ घर लौट आया, जबकि वह अपनी मां के साथ खेत में रही।


पांच लोगों ने पीछे से किया हमला

परिजनों के मुताबिक खेत में मां और बेची कुछ दूरी पर घास काट रहे थे, इस दौरान मां को बिल्कुल खबर नहीं हुई कि पीड़िता का अपहरण कर लिया गया है। जब मां उसकी तलाश में कुछ दूर गई तो खेत में उसे अचेत अवस्था में पाया। परिवार ने कहा कि चार से पांच लोगों ने उस पर पीछे से हमला किया, उसे उसके दुपट्टे से बांध दिया और उसे एक बाजरे के खेत में खींच कर ले गए। वहां उन सभी ने पीड़िता के साथ गैंगरेप किया। मां ने देखा उसकी गर्दन बुरी तरह जख्मी थी।


परिवार ने पुलिस पर लगाए ये आरोप

परिवार ने पुलिस पर इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। आरोप में पीड़िता के परिवाल वालों ने कहा कि बेटी को टूटी हड्डियों के कारण सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और उसे शुरू से ही ऑक्सीजन की जरूरत थी। लेकिन पुलिस ने चार-पांच दिनों की देरी के बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर जानकारी दी। हालांकि पुलिस ने परिवार के आरोपों का खंडन किया और कहा कि वह शुरू से ही इस घटना की गंभीरता से जांच कर रहे थे।


पुलिस ने रेप से इनकार किया

पुलिस ने कहा, अपराध के लिए संदीप रामू, लवकुश और रवि की गिरफ्तारी हमारी त्वरित कार्रवाई का सबूत है। इस बीच, हाथरस के एसपी विक्रांत वीर ने कहा है कि हाथरस या अलीगढ़ के डॉक्टरों द्वारा यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं की गई थी। हालांकि, एसपी ने कहा कि इस मामले की जांच डॉक्टरों द्वारा फोरेंसिक मदद से की जाएगी। एसपी विक्रांत वीर ने कहा कि पीड़िता की जीभ काटने की खबर गलत थी।


हत्या के इरादे से आए थे हमलावर

पुलिस अधिकारी ने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें भी आई हैं कि युवती की रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी, यह गलत है, युवती का गला घोंटकर हत्या किया गया और गर्दन की हड्डी पर चोटें आईं हैं। पीड़िता को पहले अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को 'गंभीर' बताया था। हमलावरों द्वारा उसका गला घोंटने के दौरान पीड़ित ने अपनी जीभ काट ली थी। सकी गर्दन की तीन हड्डियां टूटी हुई थीं। ये संकेत स्पष्ट है कि हमलावर युवती की हत्या के इरादे से आए थे।


मंगलवार को हुई पीड़िता की मौत

इस बीच परिवार ने शिकायत की है कि उन्होंने पुलिस से बेटी को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया क्योंकि उसकी हालत बहुत गंभीर थी। लेकिन पुलिस ने उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया। 29 सितंबर के अस्पताल में 19 वर्षीय दलित युवती की मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने इसके लिए पुलिस की निष्क्रियता और समर्थन की कमी को जिम्मेदार ठहराया है।


सीएम योगी ने किया SIT का गठन

बता दें कि मामले के तूल पकड़ने के बाद विपक्ष के निशाने पर आई योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी की यह टीम सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी। बता दें कि एसआईटी में दलित और महिला अधिकारी भी शामिल हैं। गृह सचिव भगवान स्वरूप, डीआईजी चंद्र प्रकाश और सेनानायक पीएसी आगरा पूनम एसआईटी के सदस्य होंगे। सीएम योगी ने पूरे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लाने के निर्देश भी दिए है। बता दें इस मामले में चारों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज दिया है।



Post a Comment

0 Comments