अगर जज्बा लोगों को प्रेरित करे तो हसरतें जवां हो तो हैसियत मायने नहीं रखती (पढ़े पुरी खबर)...

 

कहते हैं कि इरादे नेक हो मंजिल पाने की चाह हो तो हसरत के सामने हैसियत मायने नहीं रखती गणेश कुमार केसरी 12वीं का छात्र है और इसके मन में भी ऐसी ही परिकल्पना है लॉकडाउन में पिताजी का दुकान छूट गया तो सड़क के किनारे गैस चूल्हा रिपेयरिंग का फुटपाथ दुकान लगा लिया ऐसे में गणेश कुमार केसरी ने भी कमान संभाल ली रोटी जरूरी है इसलिए रोटी के साथ पढ़ाई को भी जारी रखने के लिए फुटपाथ पर ही पाठशाला लगा लेते हैं।

फुटपाथ पर लगा यह दुकान गैस चूल्हा रिपेयरिंग का है लॉकडाउन से पहले फुटपाथ का यह दुकान कभी बड़े दुकान में चला करता था लेकिन उतना किराया नहीं दे सकते थे इसीलिए दुकान छोड़ दिया और अब फुटपाथ पर ही दुकान लगा ली गई पिताजी अब बूढ़े हो चुके हैं और लॉकडाउन में मां भी चल बसी ऐसे में पढ़ाई को भी जारी रखना था सपने को भी साकार करना था इसलिए दुकान की कमान 12वीं का छात्र  गणेश कुमार केसरी ने संभाल ली रोटी के साथ पढ़ाई को जारी रखने के लिए दुकान पर ही किताब लेकर चले आते हैं और पढ़ाई शुरू कर देते हैं गणेश कुमार केशरी झोसागढ़ी के  रहने वाले हैं ऑफिसर बनना चाहते हैं गणेश ,इसीलिए कुछ समय तक पिताजी काम करते हैं।

और बाकी समय में गणेश दुकान संभालता है। जब तक कोई दूसरा ग्राहक ना आ जाए पढ़ाई जारी रखता है कुल मिलाकर गणेश कुमार का यह जज्बा लोगों को प्रेरित कर रहा है की हसरतें जवां हो तो हैसियत मायने नहीं रखती।



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