आप सभी अनुभव करते होंगे कि हमारा बचपन कितना अच्छा था ना कोई चिंता थी ना कोई फिकर थी ना पढ़ने की चिंता थी न कमाने की चिंता थी बचपन में सिर्फ और सिर्फ एक काम होता था खेलना कितना जी भर के खेल लिया जाए तो वह समय काफी अच्छा था बहुत लोगों की यह तमन्ना होती है कि हमारी पूरी जिंदगी जैसे बचपन बीता उसी तरह से बीते लेकिन क्या कभी आपने यह सोच कर देखा है कि बचपन में हमें कोई चिंता फिक्र क्यों नहीं रहती थी क्योंकि बचपन में हमारे ऊपर दूसरों का प्रभाव नहीं पड़ता था जैसे हम युवावस्था में अपने से ज्यादा दूसरों की चिंता करते हैं कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचेंगे यदि हम यह ड्रेस पहनेंगे तो सामने वाले हम से प्रभावित होंगे कि नहीं होंगे हम यह काम करेंगे तो लोगों को अच्छा लगेगा कि नहीं लगेगा लेकिन बचपन में ऐसा नहीं था बचपन में जो चीज हमारे दिल के अंदर से आती थी हम वही करते थे वही बोलते थे वही पहनते थे इसीलिए हमारा बचपन बहुत सुंदर था। तो युवावस्था की उम्र में आकर हमारे अंदर इतना असमंजस की भावना क्यों आ जाती है
क्यों हम हमेशा कंफ्यूजन में रहते हैं कि क्या करें क्या ना करें कौन से क्षेत्र में अपना करियर बनाएं कौन से क्षेत्र में स्कोप ज्यादा है कौन से क्षेत्र में इज्जत जाता है कौन से क्षेत्र में अपना कैरियर बनाएंगे तो लोग हमें ज्यादा से ज्यादा प्रशंसा करेंगे इन्हीं चीजों को सोच कर के हम कोई वक्त निर्णय ले ही नहीं पाते हैं और हमेशा दूसरों के बारे में सोचते रह जाते हैं कि दूसरे क्या कहेंगे तो अपनी जिंदगी में हमें थोड़ा बदलाव लाना चाहिए दूसरे कुछ नहीं कहेंगे यदि आप इस बात को समझने की कोई हमें कुछ कहता भी है तो वह कहा उसके मुंह से बात निकली वह चला गया तो उस पर्सन को उस व्यक्ति को हम उसी क्षण अपनी जिंदगी से डिलीट कर देंगे क्योंकि फोन में जब कोई चीज बिना काम की हो जाती है तो आप क्या करते हो उसको डिलीट कर देते हो या फोन में कुछ ऐसे मैसेज आने लगे कुछ ऐसे लोगों की इस पर कॉल आने लगे तो आप क्या करते हो उनको ब्लॉक कर देते हो डिलीट कर देते हो तो वही काम आपको अपनी जिंदगी में भी करना है यदि आपको कोई परेशान करें आपको बार-बार कोई सलाह दे जो आपके लिए उचित ना हो आपको लगता है कि वह चला आपके लिए उचित नहीं है
तो आप उस पर्सन को उसी समय अपनी जिंदगी से हटाइए एकदम से उसको हटा कर फेंक दीजिए डिलीट कर दीजिए क्योंकि वह आपको सिर्फ आपके मकसद से आपकी मंजिल से भटकाने का और कुछ भी नहीं करेगा क्योंकि बाहर की दुनिया दिल से कभी यह नहीं चाहती है कि कोई इंसान आगे बढ़े या जिंदगी में कुछ बड़ा करें लेकिन जब कोई इंसान अपने जीवन में कुछ बहुत बड़ा हासिल कर लेता है तो यही दुनिया जो कि चाहती ही नहीं थी कि यह इंसान कुछ बड़ा करें वह दुनिया आपके साथ होली भी आपके साथ एका एका आ करके खड़ी हो जाएगी कि हां मैं तो जानता ही था कि यह बच्चा एक न एक दिन कुछ करेगा कुछ बड़ा अजीब करेगा तो यदि कामयाबी पानी है
तो आपको मेहनत अकेले ही करना पड़ेगा क्योंकि आप सबको साथ लेकर के मेहनत करना सोचोगे तो लोग आपको मेहनत करने ही नहीं देंगे सिर्फ आपको भटका आते रहेंगे। और रही बात की बचपन वापस कैसे आएगा तो बचपन तो वापस नहीं आ सकता लेकिन आप अपनी आदतों को बदलकर युवावस्था में भी अपने को बचपन का एहसास दिला सकते हैं वह सिर्फ और सिर्फ आपके विचारों पर और आपकी सोच पर निर्भर करता है यदि आप चाहो तो जिंदगी भर बच्चे बने रहो वह तो आपकी मर्जी है लेकिन बच्चा सिर्फ विचार से रहना है कि किसी के बारे में ना तो बुरा सोचना है ना ही किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोचना है और ना ही चिंता करनी है
बहुत ज्यादा अब इस मायने में ना बच्चे बन जाए कि हम युवावस्था में बच्चों वाली हरकतें फिजिकली रूप से करें तो वह सही नहीं होगा हम को मन से बच्चा बने रहना है मतलब बच्चे की तरह कोमल और साफ मन रखना है केवल अपना।
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