गीजर चलाकर नहाना पड़ सकता है महंगा, रहें सावधान



-नहाए तो बंद नहीं करें तंग बाथरुम घर के अंदर अंगीठी जलाने पर बंद न करें घर जागरण संवा

-नहाए तो बंद नहीं करें तंग बाथरुम, घर के अंदर अंगीठी जलाने पर बंद न करें घर

कोरोना महामारी और मौसम में लगातार आ रहे बदलाव में इन दिनों उत्तर बंगाल और हिल्स में सर्दी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। आधुनिक युग में सर्दी से बचने के लिए कई प्रकार के अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करते है। सर्दी से बचने के लिए सुबह गीजर चलाकर नहाते है। कई घरों में तो लोग अंगीठी और हीटर जलाकर रात भर सोते है। सर्दियों में गर्मी का एहसास करवाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गैस गीजर, हीटर व अंगीठी खतरनाक हैं। कमरे में अंगीठी जला कर सोना और सर्दी में ठंडे पानी से नहाने की बजाय गर्म पानी की सुविधा के लिए गैस गीजर का इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हर साल गैस गीजर से होने वाली ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। इस संबंध में सिलीगुड़ी के चिकित्सक समर्थ अग्रवाल ने बताया कि बाथरूम में खिड़किया और दरवाजा बंद होने व गैस गीजर बर्नर चलने से अंदर आक्सीजन की कमी हो जाती है और कार्बन मोनोआक्साइड और मीथेन गैस अधिक पैदा होने लगती है। इससे बंद बाथरूम में नहाना खतरनाक साबित हो सकता है। छोटे बाथरूमों में ऐसी समस्याएं अधिक आती हैं। ऐसे मामले बच्चों में अत्याधिक सामने आ रहे हैं। दिमाग की नसें कमजोर हो जाती हैं तथा ब्रेन डैमेज होने से मौत भी हो सकती है। इस प्रकार के मामले पहले भी शहर के समर नगर और दार्जिलिंग में देखने को मिला है। बंद बाथरूम में गैस गीजर चलने से ऑक्सीजन की कमी से घुटन, छाती में दर्द, चक्कर आना, आवाज कम हो जाना तथा हाथ पैरों की मूवमेंट कम होने से नहाने वाला अपने आप को संभालने में असमर्थ होकर बेहोश जाता है। कई बार मौत भी हो जाती है। न्यूरो सर्जन ए के मिश्रा ने बताया कि कमरे में अंगीठी व हीटर चलाकर सोने को भी खतरनाक मानते हैं। उन्होंने बताया कि कोयले से निकलने वाली मीथेन और कार्बन मोनोआक्साइड गैसों से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। हीटर कमरे के अंदर की हवा सोख लेता है। इसकी वजह से कंठ सूखने लगता है और फेफड़े सास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया में कमजोर पड़ने लगते है। ऐसे में आदमी कई बार बेहोश हो जाता है।

हीटर व गीजर इस्तेमाल में सावधानिया

- गैस गीजर वाले बाथरूम की खिड़किया खुली रखें। अधिक समय तक नहाने वाला बाहर न आए तो दस्तक देकर स्थिति जानने की कोशिश करें। मरीज को तुरंत खुले में ले जाएं। गैस गीजर व सिलेंडर बाहर लगाएं। छोटे बच्चों का खास ध्यान रखें। तंग बाथरूम में गैस गीजर लगाने से गुरेज करें। अंगीठी जलाने के बाद हवा आने-जाने का रास्ता अवश्य छोड़ें। सोते समय किसी भी हाल में अंगीठी घर के अंदर न रखें। दिन के समय भी अंगीठी जला कर सोने की कोशिश न करें। कोयले के बजाय लकड़ी जलाएं। बच्चों तथा बुजुर्गो की पहुंच से अंगीठी दूर रखें। आधे घटे से ज्यादा अंगीठी को अंदर न रखें, थोड़ी थोड़ी देर बाद बाहर निकालते रहें। कमरे एक कोने में पतीले व अन्य बर्तन में पानी भर कर रखें।


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