भारतवर्ष और विश्व के लिए अगले तीन चार महीने बहुत ही चुनौती भरे होंगे। इस समय अवधि में कई ग्रह अस्त होंगे तो कई ग्रह एक राशि में आएंगे। कई ग्रह जल तत्त्व की राशि में आकर भारतीय भूभाग पर प्राकृतिक एवं मानवीय हानि के संकेत दे रहे हैं। सबसे पहले मकर राशि की बात करते हैं। इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी दिन बृहस्पतिवार की है और उससे पहले कर्क संक्रांति भी बृहस्पतिवार की थी। शास्त्रीय उल्लेख इस प्रकार है:
’कर्क मकर दो बहन है,जो बैठे एक ही वार। के प्रजा का पति मरे के पडे अचिन्त्योकार’
अर्थात अगर मकर और कर्क राशि एक ही वर्ष में एक ही दिन को आती है तो वह पूरा वर्ष राजाओं के लिए हानिकारक है। देश में अराजकता एवं उपद्रव का माहौल बनता है।
दिनांक सात जनवरी को शनि पश्चिम में अस्त हो रहे हैं और बृहस्पति 17 जनवरी को अस्त हो जाएंगे। मकर राशि में सूर्य आने से जनवरी मास के उत्तरार्ध में कई ग्रहों का योग मकर राशि में बनेगा। इसमें सभी ग्रह अस्त की श्रेणी में आएंगे। मकर राशि जल तत्व की राशि है। इसलिए इस राशि में कई ग्रहों का संयोग भारतीय भूभाग पर असम्भावी घटना चक्र, हिंसा, उपद्रव प्राकृतिक घटनाओं का कारक बन रहा है। भूकंप, हिमपात, दिग्दाह, भूस्खलन और भयंकर वर्षा आदि से जनधन की हानि के संकेत मिल रहे हैं। नौ फरवरी से मकर राशि में षडग्रही योग बन रहा है। अर्थात मकर राशि में 6 ग्रह विराजमान होंगे। इसका फलादेश बहुत ही नेष्ट बताया गया है।
शास्त्रीय उल्लेख यह है:
’षट्वैग्रहा:ध्वन्ति समस्तभूपान् लोकान् च’
अर्थात जब कभी छह ग्रह या उससे अधिक ग्रह एक राशि में संयोग करते हैं तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में दुख का कारण बनते हैं। राष्ट्र नायकों का युद्धोन्माद, तानाशाही, भयंकर मारकाट एवं युद्ध का उद्घोष आदि होने की संभावना बनती है। सन 1962 में भी चीन के साथ युद्ध के समय यही षडग्रही योग बना था। दूसरा शास्त्रीय प्रमाण यह है-
’गुरु शुक्रो यदैकस्थो नरयुद्धो तदा भवेत्।’
यदि शुक्र और गुरु एक ही राशि पर आ जाएं तो महानगरों में देश के किसी भाग में जमकर दंगे,फसाद होते हैं। कहीं बर्फबारी, झंझावात अकाल, चक्रवात,समुद्री तूफान आदि के हालात से जनता त्राहि-त्राहि करती है। चीन और पाकिस्तान के युद्ध के समय भी ऐसा ही योग बना था। शुक्र और गुरु का एक राशि में आगमन 27 जनवरी से हो रहा है जो 19 फरवरी तक रहेगा। वैसे भी इस राशि में छह ग्रहों का योग बहुत ही विषम परिस्थिति उत्पन्न करने वाला होगा। सन् 2021 यद्यपि बृहस्पति का वर्ष है, किंतु बृहस्पति स्वयं ही शनि के साथ तामसी योग में विचरण कर रहे हैं और एक महीना अस्त भी रहेंगे। इसलिए बृहस्पति का शुभ प्रभाव समाप्त हो रहा है।
0 Comments