
दो-दो हजार में मजदूर तो बना दिया, अब नहीं दे रहे राशन
शिवपुरी। जिलेभर में प्रशासन ने कई पात्र और अपात्र लोगों को मजदूरी कार्ड रेबड़ी की तरह बांट दिए, परंतु उन कार्डों पर जब लोगों ने प्रशासन से राशन मांगना शुरू किया तो जिम्मेदारों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। हालात यह हैं कि हितग्राहियों को यहां से वहां, वहां से यहां भगाया जा रहा है। यह मजदूरी कार्ड हजारों लोगों को तो दो-दो हजार रुपए लेकर बांटे गए हैं। कुल मिलाकर मजदूरी कार्ड धारक भी राशन के लिए परेशान हैं।
ज्ञात रहे कि प्रशासन द्वारा न सिर्फ राशन कार्ड धारकों को बल्कि मजदूरी कार्ड धारकों को भी राशन का वितरण किया जा रहा है। गरीब परिवारों को राशन बांटने की हकीकत की पड़ताल करते हुए पत्रिका के सामने एक और बात का खुलासा हुआ कि शिवपुरी में नगर पालिका ने बिना किसी वेरीफिकेशन के दलालों के माध्यम से हजारों अपात्र लोगों को मजदूरी कार्डों का वितरण कर दिया है। कई पात्र लोगों से भी मजदूरी कार्ड के एवज में दो-दो हजार रूपए तक वसूल किए गए हैं। इस बात का खुलासा स्वयं उन कार्ड धारकों ने किया, जिनके कार्ड बने हैं। कार्ड धारकों का कहना था कि उनसे कार्ड बनाने के एवज में 1800-1800 रुपए तक लिए गए हैं, अब उन्हें इन कार्डों पर राशन तक नहीं दिया जा रहा है। हितग्राहियों के अनुसार जब वह राशन लेने कंट्रोल पहुंचते हैं तो कह दिया जाता है कि उनके कूपन ही नहीं आए हैं। जब नगर पालिका जाते हैं तो वह फूड ऑफिस भेज देते हैं और फूड ऑफिस वाले कह देते हैं कि उनके यहां कोई कूपन नहीं आते हैं। कुल मिलाकर मजदूरी कार्डों पर भी कागजों में ही राशन का वितरण किया जा रहा है।
जब गेहूं ही नहीं तो क्यों लिख रहे नाम?
यहां उल्लेख करना होगा कि नगर पालिका को जो 100 क्विंटल गेहूं जारी किया गया था, वह गेहूं नपा ने बांट दिया है। नपा के अधिकारियों के अनुसार 15 अप्रैल से नपा में गेहूं है ही नहीं। इसके बाबजूद नगर पालिका में हर रोज दर्जनों लोगों के नाम गेहूं के लिए लिखे जा रहे हैं। आरआई का कहना है कि वह वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं परंतु ऊपर से गेहूं का आवंटन ही नहीं दिया जा रहा है। विचारणीय पहलू यह है कि जब गेहूं का आवंटन नहीं दिया जा रहा है तो फिर नपा में गेहूं के लिए नाम लिखने का खेल क्यों खेला जा रहा है? इससे तो वहां जुटने वाली भीड़ में इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।
हमने पैसे देकर तो यह कार्ड बनवाए हैं, अब इन कार्डों पर राशन तक नहीं दे रहे हैं। हमें कहा जा रहा है कि आपका कूपन ही नहीं आया है।
रामसखी पाल, हितग्राही की पत्नी
हमसे मजदूरी कार्ड बनाने क बदले में 1800 रूपए लिए थे। जब हम मजदूरी कार्ड वाला राशन लेने कंट्रोल गए तो हमें यह कह लौट दिया कि हमारा राशन ही नहीं आया है।
दौलत सिंह, हितग्राही
-हमारे कार्ड पर राशन लेने पहुंचे तो कहा कूपन नहीं है, कूपन के लिए नपा जाओ, नपा गए तो कह दिया कि फूड ऑफिस जाओ। फूड ऑफिस वालों ने कह दिया कि हमारे यहां कूपन नहीं आते हैं। अब हम करें तो क्या करें?
वर्षा भार्गव, हितग्राही की पत्नी
ये बोले जिम्मेदार
मजदूरी कार्ड वालों को पात्रता पर्ची जारी ही नहीं होनी है। उन्हें सिर्फ अपने वार्ड की कंट्रोल पर जाना है अगर उनका नाम सूची में है तो उक्त सूची के आधार पर उन्हें अपना खाद्यान लेना है। अगर ऐसे हितग्राहियों को यहां से वहां भटकाया गया तो लापरवाहों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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