
एक पिता और उसका एक छोटा बेटा, उसकी माँ के जाने के बाद बस यही उनका छोटा सा परिवार है| पर पिता माँ के जाने के बाद चिडचिडा सा हो गया है वो हमेशा ही बस अपने काम में खोया रहता है अपने बच्चे के लिए उसके पास बिलकुल समय नही है| और अब तो उस 9 साल की छोटी सी जान को भी इसकी आदत पड़ चुकी है| सुबह-सुबह स्कूल जाने का समय हो रहा है और पिता को ऑफिस के लिए लेट हो रहा है वो चिल्लाता है राहुल जल्दी नीचे आओ तैयार होने में कितना समय चाहिए तुम्हे अगर तुम्हारी स्कूल बस निकल गयी तो तुम्हारी खेर नही...राहुल डरा डरा सा नीचे आता हुआ कहता है सॉरी पापा मेरी सॉक्स नही मिल रही थी|

पिता डांटते हुए कहता है कितनी बार कहा है की अपना सामान संभाल कर रखा करो अब चलो जल्दी नही तो बस निकल जाएगी| शाम को पिता ऑफिस से वापस आता है और देखता है की राहुल अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल खेल रहा है और उसने अपने जूते गंदे कर लिए है वो जोर से राहुल पर चिल्लाता है उसके दोस्तों के सामने उसे खूब डांट लगाता है और घर चलने को कहता है बेचारा राहुल रोता रोता अपने कदम घर की तरफ मोड़ लेता है|

रात को पिता एक किताब पढ़ रहा होता है तभी राहुल सहमे सहमे से कदमो से अपने पिता के पास आता है| पिता फिर ऐंठ कर कहता है अब क्या परेशानी है तुम सोये क्यों नही अभी तक अब क्या हुआ.... राहुल धीरे से कहता है सॉरी पापा और अपने पिता के गाल को चूम कर कहता है गुड नाईट बस यही बोलना था और वापस अपने कमरे में जाकर सो जाता है...पिता की आँखों में आसू आ जातें है वो बहुत देर तक अपनी उस कुर्सी पर बैठ कर सोचता रहता है और फिर राहुल के कमरे में जाता है सोते हुए राहुल के सर पर हाथ फेरते हुए कहता है....
मुझे माफ़ कर दो बेटा तुम्हारी माँ के जाने के बाद मैं सबसे अलग हो जाना चाहता था सबसे दूर रहना चाहता था पर इन सब में मैं ये कैसे भूल गया की तुम उसका और मेरा अंश हो हमारा हिस्सा हो...मैं तुम पर हमेशा गुस्सा करता रहा तुम्हारी हर छोटी गलती पर तुम्हे डांटता रहा मैं ये कैसे भूल गया की में एक 9 साल के बच्चे से ज़रूरत से ज्यादा उम्मीदें कर रहा था| मैं तुम्हारे व्यवहार को अपनी उम्र के तराजू में तौल रहा था|तुम्हारा नन्हा सा दिल इतना सच्चा और अच्छा है की आज मैंने तुम्हारे दोस्तों के सामने तुम्हारी इतनी बेईज़ती की फिर भी तुम मुझे गुडनाईट किस देने आये| मैं शर्मिंदा हूँ| मैं वादा करता हूँ की आज से मैं तुम्हारा प्यारा पापा बन कर दिखाऊंगा, तुम्हारे साथ खेलूँगा,तुम्हे स्कूल जाने के लिए तैयार करूँगा,तुम्हारे साथ हसूंगा, तुम्हारी तकलीफें बाटूंगा,तुम्हारी हर बात मन लगा कर और ध्यान से सुनूंगा| 
मुझे अफ़सोस है की मैंने तुम्हे बच्चा नही बड़ा मान लिया था कल तक तुम अपनी माँ के बाहों में थे सर कंधे पर रखे और मैंने तुमसे कितनी ज्यादा उम्मीदें लगा ली थी| मुझे माफ़ कर दो अब से ऐसा कभी नही होगा कभी भी नही...
आपको क्या लगता है क्या हम भी कभी कभी राहुल के पिता की तरह अपने बच्चो से ज़रूरत से ज्यादा उम्मीदें नही लगा लेते उनके छोटे छोटे कंधो पर अपनी बड़ी बड़ी ख्वाशिओं की ज़िम्मेदारी नही डाल देते| 
वो बच्चे है चलिए उन्हें बच्चे ही रहने दें क्यूंकि ये बचपन उनकी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पहलु है जो कभी लौटकर वापस नही आएगा तो क्यों न उन्हें इसे खुल कर जी लेने दिया जाये....आपको क्या लगता है?
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