राजघराने की रानी बनते-बनते क्यों आजीवन कुंवारी रह गयीं लता मंगेशकर?



'लता मंगेशकर' इस नाम से देश का हर एक नागरिक वाकिफ है। बच्चे से लेकर वृद्ध तक हर एक की जुबान पर आज भी उनका नाम है। 6 दशकों तक अपनी आवाज से लोगों के दिलों में राज करने वाली मशहूर गायिका लता मंगेशकर के चाहने वाले न केवल देश में हैं बल्कि विदेशों में भी उनके लाखों फैन्स मौजूद हैं।मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है, जिनमें राष्ट्रीय पुरस्कार,पद्म भूषण,पद्म विभूषण,दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रमुख हैं। उनकी जिंदगी से जुड़ी बातों को लोग जानना और सुनना बेहद पसंद करते हैं।

एक सवाल जो हमेशा उनके चाहनेवालों के जेहन में आता रहता है और वो ये कि लता मंगेशकर ने कभी शादी क्यों नहीं की? क्या थी इसके पीछे की वजह? बहुत कम लोगों को इसके बारे में पता है। तो चलिए आज आपको भी बताते हैं कि इस महान शख्सियत ने अपनी जिंदगी में कभी किसी से शादी क्यों नहीं की?



दरअसल, उनके शादी न करने के पीछे कई सारे कारण थे। एक तो बेहद कम उम्र में ही उनके ऊपर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी थी। बड़ी बेटी होने के नाते भाई-बहनों की जिंदगी को संवारने में वे इतनी व्यस्त रहीं कि अपनी शादी के बारे में सोचने का उन्हें कभी मौका ही नहीं मिला। हालांकि इसके पीछे एक और गहरा राज है जिसके बारे में आपको बताने जा रहे हैं।यहां बात कर रहे हैं राजस्थान के डूंगरपुर राजघराने के राज सिंह के बारे में। लता मंगेशकर के साथ राज सिंह राज सिंह डूंगरपुर के रिश्ते की कई खबरें अकसर मीडिया में आती रहती थीं । 19 दिसंबर 1935 को राजपूताना के डूंगरपुर राजघराने में पैदा हुए राज सिंह की दोस्ती लता मंगेशकर के भाई से थी। दोनों एक साथ क्रिकेट खेला करते थे।



राज सिंह जब बड़े हुए तो लॉ की पढ़ाई करने के सिलसिले में मुंबई गए वहां दोबारा उनकी मुलाकात अपने पुराने दोस्त और लता मंगेशकर से हुई। लता मंगेशकर के भाई के साथ राज सिंह अकसर उनके घर पर जाया करते थे। वक्त बीतता गया और उनकी दोस्ती लता जी से हो गई। दोनों की दोस्ती बार बार होने वाली मुलाकातों के कारण प्यार में बदल गयी। लेकिन दोनों एकदूसरे को पसंद करने के बावजूद शादी नहीं कर पाए और इसके पीछे की वजह थी राज सिंह का अपने पिता से किया गया वादा। ऐसा कहा जाता है कि राज सिंह ने अपने मात-पिता से यह वादा किया था कि वो किसी भी आम घर की लड़की को बहू बना कर राजघराने में नहीं लाएंगे। शायद यही वजह रही कि वे लता जी से अपने रिश्ते को कोई नाम न दे सके।

साल 2009 के 12 सितम्बर को राज सिंह डूंगरपुर ने अपना पार्थिव शरीर त्याग दिया। माता-पिता से किए गए वादे को उन्होंने जीवन भर निभाया और किसी आम लड़की से शादी नहीं की लेकिन एक बात ये भी है कि उन्होंने किसी से भी शादी नहीं की। उन्होंने अपने पिता को दिया हुआ वचन भी नहीं तोडा और लताजी के साथ के अपने गहरे प्यार को भी उन्होंने निभाया और ताउम्र शादी नहीं की।यही लताजी ने भी किया और जिंदगी भर कुंवारी रहीं। इन सबके बावजूद दोनों चैरिटी के लिए एक-दूसरे की अकसर मदद किया करते थे। उनके रिश्ते का असर कभी भी इस पुण्य काम पर नहीं पड़ा।



आपको बता दें, महाराज राजनीति के साथ ही साथ क्रिकेट की दुनिया से भी जुड़े रहे। राज सिंह 16 साल तक राजस्थान रणजी टीम के सदस्य रहें और साथ ही कई वर्षों तक बीसीसीआई से भी जुड़े रहें। इंडियन क्रिकेट टीम के कई दौरों में उन्होंने मैनेजर की भूमिका भी निभाई।

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