शराब की डिलीवरी करते हुए पकड़ा गया किशोर, जज को सुनाई आपबीती, सुनकर रो पड़े लोग,जानिए

 जब किसी अपराधी को सजा के बजाए जमानत मिल जाए तो इसे आप क्या कहेंगे, है ना चौंकाने वाली बात। बिहार के नालंदा जिले के जिला किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा रिमांड करने के लिए दीपनगर थाना पुलिस द्वारा लाए गए आरोपी किशोर को सजा देने की बजाए घर भेजने का आदेश दिया। 

हुआ यूं कि 14 वर्षीय किशोर को गत रविवार को दीपनगर पुलिस ने एक प्लास्टिक में बंधे 5 बोतल शराब के साथ गिरफ्तार किया था। जब उस किशोर को को कोर्ट में पेश किया गया तो जज के सामने उसने बताया कि उसने एेसा क्यों किया। वजह सुनकर वहां मौजूद लोग ही नहीं बल्कि जज का भी दिल पसीज गया और उन्होंने उसे उसी समय जमानत दे दी।

किशोर ने बताया कि उसके पिता बीमार हैं और लॉकडाउन (Lockdown) के चलते उसकी मां भी कहीं काम पर नहीं जा रही है। घर में खाने को पैसे नहीं हैं। ऐसे में उसने ये काम अपने बीमार पिता की दवा लाने के लिए एेसा अपराध किया था।

किशोर की कहानी सुन जज ने उसे तत्काल जमानत दे दी और साथ ही पुलिस को आदेश दिया कि वे उसके परिवार के राशन पानी की व्यवस्‍था करें और इसके साथ ही किशोर से अपराध करवाने वाले पर भी मामला दर्ज करने का आदेश दिया गया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने खुद किशोर के घर पहुंच कर उसकी मां को राशन व अन्य सामान उपलब्‍ध करवाए और भरोसा दिलाया कि आगे भी किसी प्रकार की जरूरत होने पर वे उनकी मदद के लिए मौजूद रहेंगे।

जानकारी के अनुसार किशोर न्याय अधिनियम 78 के तहत किसी भी नाबालिग से अपराध करवाने वाले को सात साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। जज ने इन्हीं प्रावधानों के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए किशोर से अपराध करवाने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

नियमत: 24 घंटे के अंदर लॉकअप में रखने के बजाय थाना को सूचना जेजेबी को देकर सौंपते हुए रिमांड करना होता है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए तथा बचाव के मद्देनजर न्यायधीश ने आरोपी किशोर को हिरासत में लेने के बजाय अभिभावक के साथ जाने का आदेश दे दिया। तत्पश्चात वह मां के साथ घर गया।

किशोर ने माना कि उसने विवशता में आपराधिक कार्य को अंजाम दिया। घर के एक मात्र कमाउ उसके पिता के ताड़ के पेड़ से गिर जाने से घायल अवस्था में एक माह से बेड पर हैं जिससे परिवार का खर्च चलाने के लिए उसे ऐसे कार्य को अंजाम देना पड़ा परन्तु आगे ऐसा नहीं करेगा। कोर्ट खुलने के बाद किशोर के मामले से संबंधित अन्य प्रक्रिया पूरा करने का आदेश दिया।

जानकारी के अनुसार किशोर न्याय अधिनियम 78 के तहत किसी भी नाबालिग से अपराध करवाने वाले को सात साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। जज ने इन्हीं प्रावधानों के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए किशोर से अपराध करवाने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

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