एकसाथ इतने लोग भरतपुर से जयपुर पहुंचे कोरोना वार्ड में भर्ती होने, लापरवाही या...

जिले में प्रदेश सरकार के पर्यटन और देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पत्रकार वार्ता करते हुए कोरोना जांच रिपोर्ट में हो रही लापरवाही और गड़बड़ियों को लेकर अपनी नाराजगी जताई. साथ ही कोरोना जांच रिपोर्ट में त्रुटि करने पर भरतपुर मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है.

साथ ही आमजन को यह आश्वासन दिया है कि कोरोना जांच रिपोर्ट में अब आगे से इस तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी. इस मामले पर सीएम सहित स्वास्थय मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी से भी बात हो चुकी है.

मंत्री विश्वेंद्र सिंह का गन मैन, निजी सचिव और आरटीडीसी सहित 7 कर्मियों के कोरोना जांच सैंपल दिलवाए गए थे लेकिन चौंकाने वाला मामला सामने उस समय आया, जब इनकी जयपुर से प्राप्त कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव मिली लेकिन वहीं रिपोर्ट भरतपुर मेडिकल कॉलेज द्वारा जारी कोरोना रिपोर्ट में साथ लोग कोरोना पॉजिटिव कर दिए जबकि जयपुर से उनको नेगेटिव कर दिया था. कैबिनेट मंत्री के कर्मियों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने के बाद हड़कंप मच गया. जहां सभी लोग भर्ती होने के लिए कोरोना वार्ड में चले गए लेकिन वहां के मेडिकल स्टाफ द्वारा पता लगा कि उन लोगों की रिपोर्ट तो नेगेटिव आयी है, फिर भर्ती के लिए क्यों आये हैं?

जारी की गई जांच रिपोर्ट के ऊपर किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर भी नहीं थे. भरतपुर मेडिकल कॉलेज में स्थापित कोरोना जांच मशीन द्वारा जारी की गई रिपोर्ट गलत पाए जाने पर मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कोरोना जांच रिपोर्ट संक्रमित व्यक्ति को असंक्रमित बता रही है और असंक्रमित व्यक्ति को संक्रमित बता रही है, जिससे जिले के लोगों में काफी चिंता है. 

मंत्री ने कोरोना जांच रिपोर्ट गलत पाने पर मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है, जिससे इस लापरवाही से जो जिले में भय का माहौल पैदा हुआ है, उसे ख़त्म किया जा सके. आज नौबत यह आ गई है कि क्वारंटाइन सेंटरों में भर्ती लोग कितने संक्रमित है और कितने असंक्रमित हैं, इसका विभाग को भी शायद पता नहीं है क्योंकि जिस तरह से रिपोर्ट में त्रुटि सामने आ रही है, उससे तो यही साबित होता है. 

मंत्री के कार्यालय में कार्यरत अनुपमा चीमा जिसे जयपुर से प्राप्त रिपोर्ट में कोरोना नेगेटिव बताया लेकिन भरतपुर रिपोर्ट में पॉजिटिव बताया गया. उसके बाद उनका कहना है कि जयपुर से प्राप्त रिपोर्ट में उसको कोरोना नेगेटिव बताया गया लेकिन भरतपुर मेडिकल कॉलेज से प्राप्त रिपोर्ट में उसे कोरोना पॉजिटिव बताया गया, जिसके बाद उनके कैंसर पीड़ित पिता और बुजुर्ग मां का बुरा हाल हो गया था.

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