महज चालीस हजार से शुरू किया उद्योग अब कमा रहे लाख रुपए



छिंदवाड़ा. कम लागत में घर बैठे ही उद्योग शुरू कर अच्छी खासी आमदानी कर सकते हैं। स्वयं का काम शुरू कर आत्मनिर्भर बनना बेहतर है। काम की तलाश में अपना गांव और शहर छोडऩे की बजाए उनक कामों को बढ़ावा दिया जा सकता है जिनकी बाजार में हरदम मांग रहती है और समय पर पूर्ति नहीं हो पाती। जरूरत है काम को गम्भीरता और अच्छी गुणवत्ता के साथ करने की। ऐसे कई लोग है, जिन्होंने घर से उद्योग की शुरुआत की और लाखों रुपए की आमदानी कर रहे हैं, उन लोगों से प्रेरणा और सीख ली जा सकती है। 

रोजी रोटी के लिए छिंदवाड़ा जिले से 1 लाख 50 हजार लोग बाहर गए हुए हैं, यह प्रशासनिक आंकड़ा बताता है कि लोग काम के लिए अपना गांव और शहर छोड़ चुके हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, कर्नाटक, हैदराबाद, तेलंगाना और गुजरात में 70 हजार लोग तमाम स्थानों पर काम कर रहे। इनमें से अधिकांश लोग लॉकडाउन के दौरान अपने शहर अपने घर लौट चुके हैं। हजारों किमी पैदल चलकर लौटने के बाद काम की तलाश में है। ऐसी नौबत दोबारा न आए इसके लिए जरूरी है कि ऐसा रोजगार तैयार करें जो काम लगात में घर से बैठकर संचालित किया जा सके तभी अधिक से अधिक लोग आत्मनिर्भर बनेंगे। ऐसे कई लोग है जिन्होंने बहुत कम लागत में अपने घर से रोजगार की शुरुआत कर स्वयं के साथ परिवार के सदस्यों को भी आत्मनिर्भर बना दिया है। 

घरेलू उद्योग की कहानी
हर घर में गर्मी आते ही सिवइयां बनाई जाती है। लोग हाथ की मशीन का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें बहुत अधिक समय लगता है। लोगों के पास समय भी नहीं है जिसके कारण लोग सिवइयां बनवाने लगे हैं। चंदनगांव निवासी अरूण टेम्भे ने 10 साल पहले अपने घर से 40 हजार रुपए की लागत से सिवइयां बनाने का उद्योग शुरू किया था। परिवार के तीन सदस्य मिलकर घरेलू उद्योग संचालित कर रहे हैं। टेम्भे ने बताया कि तीन माह के इस व्यवसाय में कम से कम 70 से 80 हजार रुपए कमा लेते हैं। पॉम्प्लेट बंटवाकर व्यवसाय का प्रचार किया। बारिश शुरू होने पर दूसरे काम में जुट जाते हैं। उन्होंने बताया कि घरेलू उद्योग शुरू कर अच्छी आमदानी कर सकते हैं। जो खाद्य पदार्थ हम अपने लिए तैयार कर रहे हैं उसकी गुणवत्ता सुधारकर बेचा जा सकता है।

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