क्रिकेट आज घर-घर में लोकप्रिय है और क्रिकेटर्स की लाइफ भी सोशल होती जा रही है. कौन से प्लेयर ने कितने रन बनाए, कितने विकेट लिए, खेल के मैदान के बाहर क्या कर रहे हैं, क्या पहना, किसके साथ गए सब पता होता है. लेकिन, हम आज आपको वो कहानियां नहीं बताएंगे जिसके बारे में सब जानते हैं बल्कि उन अनसुनी कहानियों की बात करेंगे जो शायद सबको पता नहीं.
ये कहानी द्रविड़ के एक फैन ने शेयर की थी तो ये कहानी हम आपको उन्हीं के शब्दों में बताते हैं.
“मेरा दोस्त कैंसर की वजह से गंभीर रूप से बीमार था. वह द्रविड़ का बहुत बड़ा प्रशंसक था, इतना कि जब भी वो बल्लेबाजी करता था हमेशा द्रविड़ के शॉट्स की नकल करने की कोशिश करता था. मैं अपने बाकी दोस्तों के साथ उसे अकसर अस्पताल मिलने जाता था. उसे ब्लड कैंसर था और ठीक होने की संभावना ना के बराबर थी. उसके लिए हमसे बात कर पाना भी बहुत मुश्किल होता. एक दिन जब हम उससे मिलकर वापिस जाने लगे तो उसने द्रविड़ से बात करने की इच्छा ज़ाहिर की.हमने सभी संभावित स्रोतों से द्रविड़ से संपर्क करना शुरू किया, हालाँकि इसकी उम्मीद कम ही थी कि हम सफल हो पाएंगे.कुछ दिनों बाद, द्रविड़ की पत्नी विजेता का फोन आया. उन्होंने बताया कि द्रविड़ ने हमारे ईमेल पढ़े हैं वह निश्चित रूप से हमारे दोस्त से स्काइप के ज़रिये बात करना चाहेंगे. अपने व्यस्त शेड्यूल से समय निकालकर द्रविड़ ने मेरे दोस्त के साथ अस्पताल में लगभग एक घंटे तक बात की और उसके चेहरे की मुस्कान फिर से वापस आ गई. इतना ही नहीं, द्रविड़ ने उसके माता-पिता, डॉक्टरों और वार्ड के अन्य सभी मरीजों से बात की.
जब श्रीनाथ ने इस बल्लेबाज़ की टाँग तोड़ दी!
श्रीनाथ अपनी गति और सटीक लाइन और लेंथ के लिए जाने जाते थे. वे बिजली की गति से गेंदबाजी करते थे. 1997 में भारत बनाम जिम्बाब्वे मैच के दौरान वे श्रीनाथ भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण का नेतृत्व कर रहे थे. इस दौरान जब श्रीनाथ की एक गेंद बल्लेबाज़ी कर रहे ग्रांट फ्लावर के थाई -पैड पर ज़ोर से टकराई तो उनको लगा शायद उनकी टाँग टूट गई है.
श्रीनाथ से जुड़ी एक और कहानी है. जवागल श्रीनाथ 12 साल तक भारतीय पेस अटैक के मुख्य गेंदबाज़ रहे. साल 2002 में उन्होंने क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया था. लेकिन, उस समय के कप्तान सौरव गांगुली चाहते थे कि श्रीनाथ अभी और खेलें. यही वजह थी कि उन्हें 2003 विश्वकप के लिए दोबारा बुलाया गया.
एक घटना का ज़िक्र करते हुए सचिन ने बताया कि भारत को 2003 आईसीसी विश्व कप के ‘सुपर 6’ में जोहान्सबर्ग में श्रीलंका के साथ खेलना था, लेकिन मैच से पहले उनका पेट खराब था और वह खेलने की हालत में नहीं थे. फिर भी, उन्होंने खेलने का फैसला किया और इस स्थिति को अपनी तरह से संभाला. उन्होंने अपने अंडरवियर के अंदर टिशू डालकर बल्लेबाज़ी की.
कपिल देव के चार छक्कों की कहानी.
कपिल देव भारतीय क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर और सफल कप्तान रहे हैं. उनके क्रिकेट करियर में कई दिलचस्प किस्से हैं. 30 जुलाई 1990 को भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए एक टेस्ट मैच में कपिल देव और नरेंद्र हिरवानी की आखिरी जोड़ी बल्लेबाजी कर रही थी. एडी हेमिंग्स के ओवर की 4 गेंदें बाकी थीं और भारत को फॉलोऑन से बचने के लिए 24 रनों की जरूरत थी. उन्होंने हेमिंग्स को लगातार 4 छक्के लगाकर भारत को फॉलो-ऑन से बचा लिया.
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