अयोध्या : जानिए, श्री राम मंदिर के डिजाइन में क्या-क्या हुआ बदलाव, शिलान्यास की तैयारियां तेज 





अयोध्या में राम मंदिर मॉडल के मुख्य शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा के बेटे व उनके सहायक शिल्पकार  निखिल सोमपुरा ने बताया कि बताया कि रामजन्मभूमि के 70 एकड़ परिसर का एक साथ विकास नहीं हो सकता और इस कार्य में पर्याप्त समय लगेगा। इसके चलते चरणबद्ध कार्य का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का पहला फोकस मंदिर निर्माण ही है। इसके चलते मंदिर मॉडल की डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 'हिन्दुस्तान' से फोन पर बातचीत में उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान तीस साल पहले डिजाइन किए मॉडल में आंशिक बदलाव किया गया है लेकिन धरातल पर यह बड़े बदलाव के रूप में दिखाई देगा।
अब करीब तीन लाख घनफुट पत्थरों की जरूरत होगी। 

उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण पर देशवासियों की निगाह लगी है और संत समाज का खासा दबाव भी है। यही कारण है कि भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री से विशेष आग्रह कर समय तय कराया गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रस्तावित मॉडल के आकार में परिवर्तन के कारण लंबाई-चौड़ाई और ऊंचाई तीनों ही बढ़ गयी है। इसके कारण मंदिर का क्षेत्रफल भी बढ़ गया है। अब उसके अनुसार ही निर्माण सामग्री की व्यवस्था करनी होगी। लाल पत्थरों से निर्मित होने वाले मंदिर में अतिरिक्त पत्थरों की भी जरूरत पड़ेगी। बताया गया कि पूर्व में सवा दो लाख घनफुट पत्थरों का अनुमान लगाया गया था लेकिन आकार और क्षेत्रफल बढ़ने से करीब तीन लाख घनफुट पत्थरों की जरूरत होगी। 

पूर्व प्रस्तावित मॉडल व वर्तमान का अंतर
लंबाई- 268 फिट 5 इंच के बजाय 318 फिट
चौड़ाई- 140 फिट के बजाए 235 फिट
ऊंचाई- 128 फिट के बजाए 161 फिट
मंदिर के अंग-अग्र भाग, सिंहद्वार, रंगमंडप, नृत्यमंडप व गर्भगृह
विस्तार-नृत्य मंडप के दाएं व बाएं भाग में प्रार्थना मंडप
शिखर- तीन के बजाए पांच  

 मंदिर में पारसनाथ की मिट्टी-जल का होगा इस्तेमाल
रामजन्म भूमि अयोध्या में मंदिर निर्माण व शिला पूजन में पारसनाथ पर्वत की मिट्टी व गंधर्व नाला के जल का भी शामिल किया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने पारसनाथ पर्वत की मिट्टी व पहाड़ से बहते गंधर्व नाला के जल को अयोध्या भेजा है। गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने पारसनाथ पर्वत की मिट्टी तथा गंधर्व नाला के जल को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा। परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा विधिवत स्नान ध्यान कर पर्वत की मिट्टी व जल का विधिवत पूजन किया गया। स्थानीय कार्यकर्ता अरुण रजक ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी के निर्देश पर मिट्टी-जल भेजा है।

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