गांव बेलरखां स्थित धत्तरवाल पट्टी में रहने वाले प्रदीप की पत्नी मोनिका ने अपने ससुर को जिगर का टुकड़ा देकर ऐसी मिसाल पेश की है जिसे पेश कर पाना हर किसी की बात नहीं होती है। प्रदीप की शादी आठ वर्ष पहले मोनिका से हुई। मोनिका जब से परिवार का हिस्सा बनी तभी से वो ससुर अजमेर की दरियादिली, पूरे परिवार को संभालने और उनकी परिवार के प्रति जिम्मेवारी को देखते आ रही थी। जब ससुर को लीवर कैंसर हुआ तो मोनिका ने एक पल भी नहीं लगाया 53 वर्षीय ससुर की जान बचाने को। कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मेदांता अस्पताल में डा. एएस सोएन द्वारा सफल आप्रेशन किया गया। ससुर की जान बची। मोनिका भी घर लौट आई है।
मेदांता अस्पताल स्थित लीवर इंस्टीट्यूट के चीफ सर्जन डा. एएस सोएन ने कहा कि कोरोना संक्रमण के बीच लीवर ट्रांसप्लांट भी अहम सर्जरी थी। अजमेर के पास डेढ़ से दो माह का समय ही बचा था और उनकी हालत गंभीर थी। ऐसे में उनकी बहु मोनिका आगे आई और लीवर ट्रांसप्लांट के लिए हामी भरी। आप्रेशन कामयाब हुआ और दोनों अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
आसान नहीं था काम
मोनिका द्वारा हां किए जाने के बाद भी उसका जिगर का टुकड़ा अपने ससुर को देना आसान नहीं था। कागजी कार्रवाई की जटिलता के चलते पहले मोनिका, फिर मायका पक्ष व सुसरालीजनों की रजामंदी ली गई। बाकायदा पीजीआईएमएस रोहतक में बोर्ड का गठन हुआ जिसमें मंजूरी ली गई। जब सुब कुछ सिरे चढ़ गया तो मेदांता अस्पताल में यह जटिल आप्रेशन किया गया। इसमें मोनिका के जिगर का कुछ अंश लेकर ससुर अजमेर के लीवर में ट्रांसप्लांट किया गया। मोनिका फिलहाल गांव वापस लौट चुकी हैं और स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। वहीं ससुर अजमेर अभी भी उपचाराधीन हैं।
मोनिका के लिए जटिल नहीं रहा निर्णय लेना
आठ वर्ष पहले गांव बेलरखां स्थित धत्तरवाल पट्टी में प्रदीप से विवाहित मोनिका को दो बच्चे (एक लड़का व एक लड़की) हैं। संयुक्त परिवार होने के चलते सभी एकसाथ रहते हैं। ससुर अजमेर दरियादिल इंसान हैं और पूरे परिवार को संभाले हुए हैं। एक दिन परिजनों को पता चला कि अजमेर लीवर कैंसर से पीडि़त हैं। चिकित्सकों के पास उपचार के लिए जाया गया तो पता चला कि डेढ़ माह में कोई डोनर नहीं मिला तो कुछ भी हो सकता है। ऐसे में अजमेर के ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव होने के चलते डोनर की तलाश शुरू हुई लेकिन ढूंढ से भी डोनर नहीं मिला। तब मोनिका आगे आई और उसने अपने खून की जांच करवाई तो वह ओ पॉजिटिव मिला। जिस पर मेदांता अस्पताल के चिकित्सक डा. एएस सोएन द्वारा जांच की गई तो मोनिका को उपयुक्त पाया गया।
बहू की सहमति के बाद उसके परिजनों से ली अनुमति : ससुर अजमेर
ससुर अजमेर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र होने के नाते बहु से बातचीत कम ही हो पाती है। जब उसकी बहु ने अपने जिगर का टुकड़ा देने की बात कही तो इसके लिए सबसे पहले उन्होंने उसके परिजनों से बातचीत की। बाकायदा मायका पक्ष के लोगों से सहमति ली गई। जब उन्होंने सहमति जताई तो ही वो राजी हो पाए। उनकी बहु ने अपने जिगर का टुकड़ा देकर देश तथा प्रदेश में एक मिसाल पेश की है।
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