मुंबई : इस शेयर ने इस साल 200 फीसदी रिटर्न दिया है. 10 साल में इसका रिटर्न 4,700 फीसदी है. पिछले तीन साल में यह 966 फीसदी चढ़ चुका है. एक साल में इसका रिटर्न 300 फीसदी से थोड़ ज्यादा है. इसका सीधा मतलब है कि इस शेयर ने अपने शेयरधारकों को मालामाल कर दिया है. इसकी वैल्यूएशन थोड़ी ज्यादा हो गई है. इसके बावजूद विश्लेषक गिरावट पर इस शेयर में निवेश करने की सलाह दे रहे हैं. यह कंपनी है जीएमएम पीफॉडलर.
यह स्मॉलकैप कंपनी है. रायटर्स के मुताबिक, एक विश्लेषक ने इसके शेयर को खरीदने, दो विश्लेषकों ने इस शेयर को अपने पास बनाए रखने और एक विश्लेषक ने इसे बेचने की सलाह दी है. इस शेयर में घरेलू म्यूचुअल फंडों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने ज्यादा निवेश नहीं किया है. इसमें सिर्फ छह म्यूचुअल फंड स्कीमों ने निवेश किया है. इन सभी की इस कंपनी में कुल मिलाकर 1.95 फीसदी हिस्सेदारी है. इसमें 27 एफआईआई का सिर्फ 0.87 फीसदी निवेश है.
जीएमएम पीफॉडलर (जीएमएम) अपने बिजनेस क्षेत्र की सबसे मजबूत कंपनी है. इसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है. यह ग्लास लाइन्ड (जीएल) इक्विपमेंट बनाती है, जिसका इस्तेमाल फार्मास्युटिकल्स और केमिकल इंडस्ट्री में होता है.
1987 में अमेरिकी कंपनी पीफॉडलर इंक ने गुजरात मशीनरी मैन्युफैक्चर्रस (जीएमएम) में 40 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी. 1999 में कंपनी में उसने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51 फीसदी कर दी थी. उसी साल इसका नाम बदलकर जीएमएम पीफॉडलर कर दिया गया था. 2015 में जर्मनी के प्राइवेट इक्विटी फंड डोएचे बेटीलिगुंग्स एजी ने पीफॉडलर का अधिग्रहण कर लिया था.
बीते कुछ सालों में मैन्युफैक्चरिंग चीन से भारत स्थानांतरित करने का काफी फायदा जीएमएम को मिला है. इसे अपनी पेरेंट कंपनी पीफॉडलर का भी सपोर्ट मिला है. अच्छी क्वालिटी वाले प्रोडक्ट्स से कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिली है. केआर चोकसी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के ग्रुप एमडी देवेन चोकसी ने कहा, "कंपनी की स्थिति बहुत मजबूत है. इसके कारोबारी सेगमेंट में इसका करीब-करीब एकाधिकार है."
चोकसी ने बताया कि जीएमएम को फार्मा और केमिकल इंडस्ट्री में तेजी का फायदा मिल रहा है. इसके अलावा चीन के मुकाबले भारतीय कंपनियों को वरीयता देने की पॉलिसी का भी जीएमएम को फायदा मिला है. उन्होंने कहा कि मैं निवेशकों को इस शेयर में गिरावट आने पर निवेश करने की सलाह दूंगा.
जून तिमाही में जीएमएम का मुनाफा 8.48 फीसदी बढ़कर 19.19 करोड़ रुपये रहा. इसकी बिक्री 2.77 फीसदी बढ़कर 154.43 करोड़ रुपये रही. नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने इस शेयर को अपने पास बनाए रखने की सलाह दी है. हालांकि, उसने अगले वित्त वर्ष के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में 5 फीसदी और मुनाफे में 6 फीसदी वृद्धि की उम्मीद जताई है.
जुलाई में जीएमएम ने फ्रांस की कंपनी डी डायटरिच प्रोसेस सिस्टम के भारतीय प्लांट का अधिग्रहण किया था. उसने 53 करोड़ रुपये में यह डील की थी. यह संयंत्र हैदराबाद में है. डी डायटरिच इस सेगमेंट की दूसरी बड़ी कंपनी है. विश्लेषकों को लंबी अवधि में जीएमएम के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. लेकिन, कुछ का मानना है कि इसकी वैल्यूएशन बहुत बढ़ गई है.
31 जुलाई को बीपी इक्विटास ने इस शेयर को बेचने की सलाह दी. उसने इसके शेयर के लिए 1,657 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है. उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हम निवेशकों को मौजूदा भाव पर जीएमएम के शेयरों में निवेश नहीं करने की सलाह देते हैं. अभी वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है.
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