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नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग (Ricky Ponting) ने अपने देश को दो बार वर्ल्ड चैंपियन बनाया. उन्हें दुनिया के सबसे कामयाब कप्तानों में शुमार किया जाता है. पोंटिंग जितने शानदार कप्तान थे उतने ही अच्छे बल्लेबाज भी थे. पोंटिंग बचपन से ही अपनी बल्लेबाजी से गेंदबाजों को जमकर पीटा करते थे. आलम यह था कि पोटिंग के कारण तस्मानिया स्टेट स्कूल को क्रिकेट के नियम बदलने पड़े थे और उस समय यह बल्लेबाज केवल नौ साल का था.
रिकी पोटिंग ने केवल 20 साल की उम्र में ही अंततराष्ट्रीय डेब्यू किया था. अपने पहले मैच में उन्होंने 96 रन बनाए थे. अपनी पारी से उन्होंने दिखा दिया था कि वह लंबी रेस के घोड़े हैं. सचिन तेंदुलकर के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में वह दूसरे नंबर हैं. वहीं वनडे क्रिकेट में वह तीसरे स्थान पर हैं.
पूरे सीजन में आउट नहीं हुए थे रिकी पोटिंग
दरअसल पोंटिंग जब नौ साल के थे तब वह पूरे एक सीजन में आउट ही नहीं हुए थे. इसके बाद तस्मानिया के इस स्कूल ने नया नियम बनाया था जिसके मुताबिक 30 रन बनाने के बाद बल्लेबाज को रिटायर होना पड़ेगा. पोंटिंग (Ricky Ponting) को बल्लेबाजी करना बहुत पसंद था ऐसे में भला एक नियम उन्हें कैसे ही रोक पता. हेराल्ड सन से बातचीत में उन्होंने बताया कैसे उन्होंने इस नियम का भी तोड़ निकाल लिया था.
पोटिंग ने नए नियम का भी तोड़ लिया था
उन्होंने कहा, '9 साल की उम्र में मैंने स्कूल क्रिकेट के पहले पूरे सीजन में बिना आउट हुए खेला और फिर अगले साल स्कूल के नियम बदल दिए गए. नए नियमों के मुताबिक 30 रन बनाने के बाद आपको रिटायर होना पड़ेगा.' पोटिंग ने बताया इसके बाद उन्होंने इसका भी हल ढूंढ लिया था. पोंटिंग ने कहा, 'मैं ओवर की पहली पांच गेंदों पर रन ही नहीं बनाता था और आखिरी गेंद पर एक रन लेता था. इस तरह मैं ज्यादा देर तक बल्लेबाजी करता था लेकिन रन नहीं बनाता था. हर बार नॉन स्ट्राइकर एंड पर आकर अंपायर से अपना स्कोर पूछा करता था. 29 रन के पास पहुंचने के बाद चौका या छक्का मार देता था.'

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