• बजट सत्र – यह सत्र फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह के सोमवार को आरंभ होता है। इसे बजट सत्र इसलिए कहते हैं कि इस सत्र में आगामी वित्तीय वर्ष का अनुमानित बजट प्रस्तुत, विचारित और पारित किया जाता है।
• सामुहिक उत्तरदायित्व – अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। इसका अभिप्राय यह है कि वह अपने पद पर तब तक बनी रह सकती है जब तक उसे निम्न सदन अर्थात् लोकसभा के बहुमत का समर्थन प्राप्त है। लोकसभा का विश्वास खोते ही मंत्रिपरिषद को तुरंत पद-त्याग करना होगा।
• कटौती प्रस्ताव – सत्ता पक्ष द्वारा सदन की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत अनुदान की मांगों में से किसी भी प्रकार की कटौती के लिए विपक्ष द्वारा रखे गये प्रस्ताव को काटौती प्रस्ताव कहा जाता है। सरकार की नीतियों की अस्वीकृति को दर्शाने के लिए विपक्ष द्वारा प्राय: एक रूपया की कटौती का प्रस्ताव किया जाता है जिसका अर्थ यह भी होता है कि प्रस्ताव मांग के मुद्दों का स्पष्ट उल्लेख किया जाये।
• अविश्वास प्रस्ताव – अविश्वास प्रस्ताव सदन में विपक्षी दल के किसी सदस्य द्वारा रखा जाता है। प्रस्ताव के पक्ष में कम-से-कम 50 सदस्यों का होना आवश्यक है तथा प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने के 10 दिन के अन्दर इस पर चर्चा होना भी आवश्यक है। चर्चा के बाद अध्यक्ष मतदान द्वारा निर्णय की घोषणा करता है।
• मूल प्रस्ताव – मूल प्रस्ताव अपने-आप में संपूर्ण प्रस्ताव होता है, जो सदन के अनुमोदन के लिए पेश किया जाता है। मूल प्रस्ताव को इस तरह से बनाया जाता है कि उससे सदन के फैसले की अभिव्यक्ति हो सके। अग्रलिखित प्रस्ताव मूल प्रस्ताव होते हैं - राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव: इस प्रस्ताव के माध्यम से सदन का कोई सदस्य मंत्रिपरिषद में अपना अविश्वास व्यक्त करता है और यदि यह प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, लोकसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या राज्यसभा के उपसभापति के निर्वाचन के लिए या हटाने के लिए प्रस्ताव, विशेषाधिकार प्रस्ताव: यह प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, अब उसे यह प्रतीत होता है कि मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य ने संसद में झूठा तथ्य प्रस्तुत करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है।
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