बिहार चुनाव: सर्वे में 57% चाहते हैं नीतीश जाएं तो जीत कैसे रहे?



इतनी नाराजगी के बावजूद भी नीतीश कुमार का आगे होना कैसे समझा जा सकता है?

गुस्सा जीत में नहीं बदल रहा

और किसी परिस्थिति में 86.5 फीसदी लोगों का नाराज होना पदस्थ सीएम की भयानक हार में बदल जाता. लेकिन बिहार के मामले में परेशानी ये है कि लोगों का ये बड़ा धड़ा बंटा हुआ है.

29.8 प्रतिशत लोगों का कहना था कि वो सरकार से नाराज तो हैं लेकिन उसे बदलना नहीं चाहते हैं. ये बीजेपी और NDA की छोटी पार्टियों के वो वोटर हो सकते हैं, जिनके लिए नीतीश एक 'मजबूरी' हैं.


जो 56.7 फीसदी लोग नीतीश से नाराज हैं और सरकार बदलना चाहते हैं, उनमें से हर कोई नीतीश के मुख्य विरोधी RJD नेता तेजस्वी यादव से प्रभावित नहीं लगता है.


RJD के नेतृत्व वाले UPA गठबंधन का अनुमानित वोट शेयर 33.4 फीसदी है. अगर ये पूरा धड़ा भी कहता है कि वो नीतीश को हटाना चाहता है, तब भी 23.3 फीसदी ऐसे होंगे जो नीतीश को तो हटाना चाहते हैं लेकिन तेजस्वी से प्रभावित नहीं हैं. ये लेफ्ट, JAP और AIMIM जैसी छोटी पार्टियों के वोटर हो सकते हैं.


क्या इसका फायदा तेजस्वी यादव को मिल सकता है, वो उभर सकते हैं?

आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन की सबसे बड़ी दिक्कत है तेजस्वी यादव की विश्वसनीयता में कमी. CVoter सर्वे में करीब 15 फीसदी जवाब देने वालों ने ही कहा कि वो तेजस्वी को बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं. वहीं इसके करीब दोगुनी संख्या में लोगों ने नीतीश कुमार को चुनना चाहा, सर्वे में नीतीश का आंकड़ा 30.9 फीसदी है.


अब देखना ये है कि सर्वे में यूपीए के लिए अनुमानित वोट शेयर है वो है करीब 33 फीसदी. तेजस्वी को मुख्यमंत्री के तौर पर चुनने वाले 15 फीसदी लोगों से ये आंकड़ा 18 पर्सेंट ज्यादा का है. इसका मतलब ये है कि जो लोग यूपीए को भी वोट करना चाहते हैं उनमें से भी आधे से ज्यादा लोग तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने से संतुष्ट नहीं होंगे. वहीं नीतीश कुमार के पास सर्वे में एनडीए को चुनने वाले दो तिहाई से ज्यादा लोगों का समर्थन है.


ये साफ है कि तेजस्वी यादव राज्य में एनडीए के खिलाफ गुस्से को भुनाने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं. 33.4 फीसदी अनुमानित वोट शेयर दिखाता है कि यूपीए यादवों और मुसलमानों वाले अपने कोर वोटर बेस से आगे नहीं बढ़ पाया है.


कुल मिलाकर यूपीए की दिक्कत का सार दो लाइनों में समझाएं तो- 5 में से 2 वोटर जो नीतीश राज से गुस्से में हैं वो यूपीए को लेकर पूरी तरह साफ नहीं हैं. और यूपीए के आधे से ज्यादा वोटर तेजस्वी यादव को लेकर साफ नहीं हैं.



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