टी नटराजन पहली बार सनराइजर्स हैदराबाद के लिए आईपीएल में खेल रहे हैं.
टी नटराजन. उम्र 29 साल. IPL 2020 में सनराइजर्स हैदराबाद का खिलाड़ी. 29 नवंबर को नटराजन ने बॉलिंग से दिल्ली कैपिटल्स को धराशायी करने का काम किया. बॉलिंग में भी यॉर्कर का विशेष इस्तेमाल. यॉर्कर फेंकने में बड़े-बड़े गेंदबाजों के पसीने छूट जाते हैं. लेकिन नटराजन के लिए यह ‘बाएं हाथ का काम’ है. क्योंकि वे बाएं हाथ के ही गेंदबाज हैं. दिल्ली के खिलाफ उन्होंने एक के बाद एक कई यॉर्कर डाली. और मैच जीतने की उनकी उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया.
मैच पूरा होने के बाद उनके गेंदबाजी आंकड़े थे. चार ओवर 25 रन और एक विकेट. यानी जितनी गेंद फेंकी, उससे बस एक रन ज्यादा. IPL 2020 में उनका अभी तक का प्रदर्शन कमोबेश ऐसा ही रहा है. इससे पहले उन्होंने RCB के खिलाफ चार ओवर में 34 रन दिए और एक विकेट लिया था. फिर KKR के खिलाफ चार ओवर में 27 रन और एक विकेट.
तीन करोड़ की बोली
नटराजन सबसे पहले नेशनल मीडिया में आए 20 फरवरी 2017 को. इस दिन आईपीएल 2017 की नीलामी हुई थी. और इसमें नटराजन को तीन करोड़ की मोटी रकम में खरीदा गया था. बोली लगाने वाली टीम थी किंग्स इलेवन पंजाब. पंजाब के इस दांव ने तहलका मचा दिया था. उनकी बेस प्राइस महज 10 लाख रुपये थी. पंजाब के दांव ने नटराजन को उस सीजन का सबसे महंगा अनकैप्ड प्लेयर बना दिया. उन पर यह दांव लगा तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) की वजह से.
TNPLतमिलनाडु का घरेलू T20 टूर्नामेंट है. नटराजन ने इस टूर्नामेंट में सात मैच में 10 विकेट लिए थे. उनका गेंदबाजी एक्शन काफी हद तक बांग्लादेश के मुस्तफिजुर रहमान से मिलता है. ऐसे में IPL टीमों के लिए नटराजन हॉट प्रोपर्टी बन गए. इसी के चलते उन पर खूब पैसा बरसा.
किंग्स इलेवन पंजाब ने एक सीजन बाद ही नटराजन को ड्रॉप कर दिया था.
IPL 2017 में नटराजन को छह मैच खेलने को मिले. इनमें उनके हिस्से तीन विकेट आए. इस प्रदर्शन के बाद पंजाब ने उन्हें रिलीज कर दिया. जिसके बाद IPL 2018 में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें 40 लाख रुपये में खरीद लिया. तब से वे इसी टीम के साथ हैं.
गुदड़ी का लाल
टी नटराजन तमिनलाडु के एक छोटे से कस्बे चिन्नप्पमपट्टी से आते हैं. यह सलेम जिले में पड़ता है. उनका परिवार एकदम साधारण था. पिता बोझा उठाने का काम करते थे. मां भी सड़क किनारे फेरी लगाकर सामान बेचा करती थी. नटराजन भी मां का हाथ बंटाया करते थे. बाकी समय क्रिकेट खेला करते. वे टेनिस क्रिकेट खेलते-खेलते बड़े हुए. गांव के ही एक व्यक्ति ने नटराजन को क्रिकेटर बनाने में मदद की. इस शख्स का नाम था जयप्रकाश.
जयप्रकाश ने नटराजन का पूरा खर्चा उठाया. खाना-पीना. कपड़े, जूते आदि. 20 साल की उम्र तक तो नटराजन टेनिस बॉल से ही खेला करते थे. यहीं से उन्हें यॉर्कर फेंकने की कला आई. नटराजन का कहना है कि टेनिस बॉस क्रिकेट में रनों की मार से बचना है तो यॉर्कर ही काम आती है.
नटराजन आईपीएल नीलामी में तीन करोड़ की बोली पर भरोसा नहीं कर पाए थे.
नटराजन को जयप्रकाश चेन्नई लेकर गए. वहां एक अकैडमी ने नटराजन की बॉलिंग देखकर अपने यहां खेलने को कहा. इस तरह नटराजन के लिए एक नया रास्ता खुल गया. फिर तो एक-एक करके वे आगे बढ़ते गए. बाकी का काम तमिलनाडु प्रीमियर लीग ने कर दिया. साल 2015 में उन्होंने बंगाल के खिलाफ फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया. लेकिन पहले ही मैच में गड़बड़ हो गई. बॉलिंग एक्शन को संदिग्ध बताया गया. उन्हें बॉलिंग से रोक दिया गया. उन्होंने अपने एक्शन में सुधार किया. बाद में नए एक्शन से उन्हें पहले से ज्यादा कामयाबी मिली.
नटराजन के नाम अभी 20 फर्स्ट क्लास मैच में 64 विकेट हैं. वहीं 15 लिस्ट ए मैच यानी घरेलू वनडे मैचों में उन्होंने 16 विकेट लिए हैं. इसी तरह 25 T20 मुकाबलों में उनके नाम 22 विकेट हैं.
खोजा भारत का लसिथ मलिंगा
नटराजन जहां से आते हैं वहां क्रिकेट की सुविधा नहीं है. IPL 2017 की नीलामी में जो पैसा मिला था. उससे उन्होंने कस्बे में ही क्रिकेट अकैडमी खोल दी. इसमें बच्चे क्रिकेट खेलते और सीखते हैं. गांव के ही एक लड़के गणेशन पेरियास्वामी को भी क्रिकेट में आगे बढ़ाने में नटराजन का बड़ा योगदान रहा. पेरियास्वामी का एक्शन एकदम लसिथ मलिंगा जैसा है.
वह भी काफी कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से हैं. पिछले सीजन में पेरियास्वामी ने भी TNPL में कमाल गेंदबाजी की. इससे उनका चयन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए तमिलनाडु स्टेट टीम में हुआ.
कार नहीं पढ़ाई
नटराजन ने क्रिकेट को बढ़ावा देने के साथ ही गांव में घर बनवाया. बाकी भाई-बहनों की पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा खुद ले लिया. अब माता-पिता को मजदूरी नहीं करनी पड़ती. जो भी पैसा कमाया उसे बुनियादी सुविधाओं में लगाया. वह अपने भाई-बहनों की पढ़ाई को लेकर काफी सक्रिय हैं. एक बार उनसे पूछा गया कि कार कब खरीदोगे? नटराजन का जवाब था,
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