New Delhi: मां तो मां ही होती है। मां को तो बस अपने बच्चों की ही खुशियां चाहिए होती है। इतिहास भी गवाह है कि जब भी बच्चों ने अपनी किसी इच्छा को अपनी मां के सामने रखी तो मां ने हमेशा पूरा किया है। हालांकि बच्चों की सभी इच्छाओं को पूरा करने में उन मां को काफी दिक्कतें होती हैं, जिनके घरों में यह नहीं पता होता है कि रात का चूल्हा जलेगा या नहीं। बहरहाल, आज हम आपको एक ऐसे मां बेटे की कहानी बताने जा रहे हैं। जिसमें मां ने अपने बेटे की इच्छा को पूरा करने के लिए मजदूरी की, फिर मजदूरी के पैसे से बेटे को बैडमिंटन खरीद कर दिया। क्योंकि 10 साल की उम्र में बेटे ने बैडमिंटन खेलने का जज्बा दिखाया था।
10 साल का वह बच्चा आज बड़ा खिलाड़ी बन चुका है
यह कहानी है अर्जुन अवॉर्डी और अंतरराष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार की। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि मेरी मां ने कभी मुझे अपनी इच्छाओं को पूरा करने से नहीं रोका। मैंने 10 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलने की इच्छा जताई थी। जिसे मेरी मां ने अगले दिन ही पूरा किया था।
गरीबी से बीता बचपन
उत्तराखंड के मूल निवासी मनोज बताते हैं कि उनका बचपन गरीबी से गुजरा है। दो वक्त की रोटी के लिए हमें तरसना पड़ता था। उनकी मां जमुना बीड़ी बनाने व मटर तोडऩे का काम करती थी। हालांकि गरीबी होने के बावजूद मां ने कभी परिवार के सदस्यों को कमजोर नहीं होने दिया। मां ने हमेशा सभी को हौंसला ही दिया है।
जब मां नहीं रही
मनोज बताते हैं कि वह गरीबी से निकलकर धीरे-धीरे आगे बढ़े। उन्होंने बताया कि साल 2011 में वह पहली बार राष्ट्रीय चैंपियन बने थे। वह बताते हैं कि उस दिन उनका परिवार उन्हें लेकर काफी खुश था। खासतौर पर उनकी मां। वह बताते हैं कि मां के मार्गदर्शन से ही वह यहां तक पहुंचे हैं। मनोज अपनी मां को आज भी बहुत याद करते हैं। मनोज की मां अब इस दुनिया में नहीं है।
कई अवॉर्ड किए हैं अपने नाम
मनोज मौजूद समय में बैडमिंटन रैकिंग में तीसरे पायदान पर हैं। इस खिलाड़ी ने अब तक 15 स्वर्ण व 47 अंतरराष्ट्रीय पदक भी जीते हैं। वह बताते हैं कि वह ओलंपिक की तैयारी के लिए अगले माह में टीम के साथ जुड़ेंगे।
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