BIG BREAKING: नशीले पदार्थों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है



सुप्रीम कोर्ट ने 22 अप्रैल को एक फैसला सुनाया. यह फैसला नारकोटिक्स ड्रग्स साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट से जुड़ा है. कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत प्रतिबंधित नशीले पदार्थ की शुद्धता नहीं, बल्कि उसकी क्वांटिटी के आधार पर सजा तय होगी.


जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस इन्दिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने ये फैसला सुनाया. साथ ही 2008 के ई. माइकल राज बनाम इंटेलिजेंस ऑफिसर, नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो के मामले में दिए गए फैसले को रद्द कर दिया. इस फैसले में कहा गया था कि NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित नशीले पदार्थ में इसकी शुद्धता मायने रहेगी. बाकी के पदार्थ के वजन को बाहर रखा जा सकता है. 2008 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि जब्त किए गए नशीले पदार्थ के वजन के आधार पर सजा देना गलत है.




जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस इन्दिरा बनर्जी और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने ये फैसला सुनाया.


फैसला देते हुए जस्टिस शाह ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी की उस दलील को माना, जिसमें कहा गया था कि 2008 के फैसले के बाद सजा देना मुश्किल हो गया है. लेखी ने दलील दी कि पांच ग्राम शुद्ध हेरोइन को 100 ग्राम स्ट्रील लेवल हेरोइन में बदला जा सकता है. अगर 0.25 ग्राम का एक डोज बनता है, तो 100 ग्राम स्ट्रीट लेवल हेरोइन को 400 ग्राम में बदला जा सकता है. विधायिका का इरादा एक पैडलिंग 100 ग्राम को छोड़ने का नहीं हो सकता था, जो कि शुद्ध खुराक के साथ 5 gm 400 ग्राम हो सकता है. अगर शुद्धता देखी जाए, तो इसमें सिर्फ छह महीने की कैद होगी.


बेंच ने कहा,


इस स्तर पर यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अवैध दवाओं को शायद ही कभी शुद्ध रूप में बेचा जाता है. वे हमेशा मिलावटी या अन्य पदार्थ के साथ बेची जाती हैं. कैफीन को हेरोइन के साथ मिलाया जाता है, इससे हेरोइन कम दर पर वाष्पित हो जाती है. हेरोइन का उदाहरण लें, यह एक शक्तिशाली और अवैध ड्रग के रूप में जानी जाती है.


कोर्ट ने आगे कहा,


इसे आसानी से विभिन्न पदार्थों में मिक्स किया जा सकता है. इसका मतलब है कि दवा विक्रेता अन्य दवाओं या गैर-नशीले पदार्थों को दवा में मिला देते हैं, ताकि वे कम खर्च पर अधिक बेच सकें. ब्राउन-शुगर/ स्मैक आमतौर पर पाउडर के रूप में उपलब्ध कराई जाती है, जिनमें लगभग 20% हेरोइन होती है. हेरोइन को चॉक पाउडर, जिंक ऑक्साइड जैसे अन्य पदार्थों के साथ मिलाया जाता है. इनसे दवा, ब्राउन-शुगर की अशुद्धियां सस्ती होती हैं, लेकिन अधिक खतरनाक होती हैं.


इन उदाहरणों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यहां तक ​​कि नशीली दवाओं या नशीले पदार्थों का मिश्रण भी अधिक खतरनाक है.






नशीले पदार्थों को रखने और सेवन के बारे में कोर्ट ने कहा कि दोषी व्यक्ति सलाखों के पीछे होना चाहिए. निर्दोष बाहर होने चाहिए. कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत मादक पदार्थों का धंधा करने की सजा एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसकी रोकथाम ज्यादा महत्वपूर्ण है. इस कानून का मकसद अपराध के बाद दोषियों को दंड देने की बजाय, नशीले पदार्थों के गैरकानूनी धंधे की रोकथाम करना है.


इसके साथ ही कोर्ट ने केन्द्र सरकार की 18 नवंबर, 2009 की अधिसूचना को चुनौती देने वाली तमाम याचिकायें खारिज कर दीं. इस अधिसूचना में कहा गया था कि एक या एक से अधिक पदार्थों के मिश्रित होने वाले नशीले पदार्थ की मात्रा का निर्धारण करते समय दूसरे पदार्थों का वजन भी नशीले पदार्थ में शामिल किया जाएगा.


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