
Chanakya Niti Hindi: जीवन में सफलता आसानी से नहीं मिलती है. इसके लिए इंसान को कठिन परिश्रम और संघर्षों के दौर से गुजरना पड़ता है. हर सफल इंसान जीवन में एक न एक बार असफल जरुर होता है. लेकिन जीवन में मिलने वाली असफलता से जो डर जाता है या घबरा जाता है उससे सफलता और धन की देवी लक्ष्मी कोसों दूर चली जाती हैं. इसलिए चाणक्य के इस श्लोक को जीवन में उतार लेना चाहिए. विशेषतौर पर वे लोग जो व्यापार के क्षेत्र में अपना भविष्य देखते हैं.
को हि भार: समर्थनां किं दूरं व्यवसायिनाम्।
को विदेश: सविद्यानां क: पर: प्रियवादिनाम्।।
अर्थात सर्मथवान के लिए कोई कार्य असंभव नहीं है. व्यापारियों के लिए कोई भी स्थान दूर नहीं है. विद्वानों के लिए देश की सीमाएं अर्थहीन हैं और मधुर वाणी बोलने वालों के लिए कोई भी पराया नहीं है.
चाणक्य के इस श्लोक का अभिप्रय ये है कि जो लोग व्यापार के क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं उन्हें पहले दिल और दिमाग से यह निकाल देना चाहिए कि वे एक निर्धारित स्थान पर ही सफल हो सकते है. चाणक्य ने व्यापारी को साहसी मानते हुए कहा कि एक सफल व्यापारी के लिए भूगौलिक सीमाए मायने नहीं रखती हैं व्यापारी को जहां भी लाभ की स्थिति नजर आए वहां पर व्यापार करना चाहिए. इसलिए उन्होंने कहा कि व्यापारी के लिए कोई भी स्थान न तो दूर है और न ही दुर्गम.
चाणक्य की इस बात को जिसने समझ लिया और जीवन में उतार लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है. इसके अतिरिक्त चाणक्य ने एक और महत्वपूर्ण बात अपनी चाणक्य नीति में कही है उसे भी जान लेना चाहिए-
धनिक: श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पंचम।
पंच्च यत्र न विद्यंते न तत्र दिवसं वसेत्।।
यानि धनवान, शिक्षाविद्, विद्वान, योग्य राजा नदी और वैद्य न हों तो ऐसे स्थान या फिर देश में नहीं रहना चाहिए. चाणक्य के अनुसार व्यापार वहीं करना चाहिए पर ये सभी चीजें उपलब्ध हों. क्योंकि धनवान नहीं होंगे तो वहां व्यापार को कोई अर्थ नहीं, इस प्रकार जहां विद्वान और कुशल राजा होंगे वहां नीति और नियमों का वर्चस्व होगा, शोषण नहीं होगा. वैद्य यानि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी वह व्यापार करने में दिक्क्त नहीं होगी. ये सभी चीजें मिलकर व्यापार के लिए एक सुखद वातावरण का निर्माण करती हैं.
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