
जयपुर।
प्रदेश में मोडिफाईड लॉकडाउन ( Modified Lockdown in Rajasthan ) के बीच Gehlot सरकार का एक बड़ा फैसला हज़ारों बेरोजगारों ( Unemployed youth ) के लिए राहत लेकर आया है। दरअसल कोरोना संकटकाल ( Corona Pandemic ) में सरकार ने 9 हजार ANM एवं GNM के पदों पर नियुक्ति करने का फैसला लिया है। सरकार के इस कदम से उन हज़ारों बेरोजगार युवाओं के लिए रोज़गार का एक सुनहरा अवसर दिया है जो नौकरी की बाट जोह रहे थे।
... ताकि चिकित्साकर्मियों की कमी ना रहे
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि कोरोना की जंग लंबे समय तक जारी रह सकती है। ऐसे में राज्य सरकार संसाधनों में किसी तरह की कमी नहीं आने देगी। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से लड़ाई के लिए चिकित्साकर्मियों की कमी नहीं रहे, इसके लिए करीब 9 हजार एएनएम एवं जीएनएम के पदों पर नियुक्ति के संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। जल्द की इनकी नियुक्ति होगी।
उन्होंने बताया कि 12 हजार पदों पर होने वाली यह भर्ती न्यायालय में उलझ गई थी। अब सरकार ने 3 हज़ार 674 न्यायिक प्रकरणों को छोड़कर शेष पदों पर नियुक्ति का निर्णय लिया है।
कोरोना से आया रोज़गार पर संकट!
कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन का सबसे बुरा असर पडा है रोज़गार के मामले में। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि कोरोना से पहले ही देश में रोज़गार को लेकर स्थिति बेहतर नहीं थी, पर इस महामारी के बाद इसके और बद्दतर होने की दिशा में जाने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि संक्रमण के फैलने और तालाबंदी के शुरू होने के बाद देश में बेरोजगारी के आंकड़ों में बहुत बड़ा उछाल आया है जो अभी जारी रह सकता है। हालांकि अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं हुए पर कई संस्थाओं की ओर से जारी हुए आंकड़े इस दिशा की ओर साफ़ इशारा करते हैं।
ऐसी ही एक संस्था सीएमआईई के अनुसार रोजगार की स्थिति मार्च की शुरुआत से ही, यानी तालाबंदी के पहले ही गिरनी शुरू हो गई थी, लेकिन मार्च के आखिरी सप्ताह और अप्रैल के पहले सप्ताह में इसमें बहुत तेज बदलाव आया।
अब घर-घर पहुंचेंगी मोबाईल वेन
कोविड-19 महामारी के कारण आम रोगियों को परेशानी का सामना नहीं करना पडे़, इसके लिए प्रदेशभर में बुधवार से 400 ओपीडी मोबाइल वैन संचालित की जाएंगी। ये मोबाइल वैन उपखण्ड मुख्यालयों के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर उपलब्ध होंगी और गांव-कस्बे तक पहुंचकर मरीजों को सामान्य बीमारियों का उपचार उपलब्ध करवाएंगी। किसी को गंभीर बीमारी होने की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी जाएगी, ताकि रोगी को तुरंत इलाज मिल सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं।
सीएम गहलोत ने मुख्यमंत्री निवास पर पत्रकारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई वार्ता के दौरान कहा कि निजी अस्पतालों में कोरोना के कारण नियमित रोगियों को समुचित उपचार सुविधा उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है और कई अस्पतालों को नोटिस भी दिया है।
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि निजी अस्पताल संकट की इस घड़ी में अपनी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं, अन्यथा सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी निजी अस्पताल से किसी मरीज को बिना इलाज वापस लौटाने की शिकायत नहीं आए।
सभी राज्यों को मिले प्रोत्साहन पैकेज
सीएम गहलोत ने कहा कि आर्थिक मंदी एवं कोरोना के कारण सभी राज्यों की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। ऐसे में भारत सरकार को प्रोत्साहन पैकेज (स्टीम्यूलस पैकेज) देना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार के समय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3 प्रतिशत प्रोत्साहन पैकेज दिया गया था। यूएसए ने कोरोना से पैदा हालातों को देखते हुए जीडीपी का 10 प्रतिशत तथा फ्रांस, जर्मनी एवं यूके ने जीडीपी का 15 प्रतिशत पैकेज दिया है, जबकि भारत सरकार ने केवल 0.8 प्रतिशत पैकेज दिया है, जो नाकाफी है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि राज्यों को इस संकट से बाहर आने में मदद मिल सके।
राज्यों की सलाह के साथ फैसले ले केंद्र सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में संघीय ढांचे की व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार राज्यों की सलाह के आधार पर निर्णय ले। यदि कोई भी निर्णय आनन-फानन में लिया जाता है तो पूरे देश को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आग्रह किया कि अगर देश में 3 मई से या जब भी लॉकडाउन खुलता है, उसकी तैयारी राज्यों की सलाह के साथ केंद्र सरकार को अभी से करनी चाहिए ताकि देशभर में सुनियोजित ढंग से आर्थिक गतिविधियां शुरू हो सकें।
जांच का दायरा बढ़ाना बेहद जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आंकलन करने के लिए जरूरी है कि टेस्ट की संख्या बढ़ाई जाए। भारत सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे। इस समय देश में प्रति दस लाख व्यक्तियों पर मात्र 291 टेस्ट हो रहे हैं, जबकि इतनी आबादी पर यूएई में 77 हजार, यूएसए में 12 हजार तथा स्पेन में 20 हजार तक जांचें हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि न केवल जांचों की संख्या बढ़े बल्कि रिपोर्ट भी समय पर आए। इसके लिए हमारा जोर अधिक से अधिक पीसीआर किट प्राप्त करने पर है। इसके लिए हमने आईसीएमआर को न्यूक्लियर एक्सटेंशन किट की आपूर्ति बढ़ाने को कहा है। उन्होंने बताया कि बैकलॉग खत्म करने के लिए हमने 4 हजार नमूने दिल्ली भेजे थे, जिनमें से 3800 की रिपोर्ट आ गई है। इनमें 80 पॉजीटिव आए हैं।
‘तो आज ये नौबत नहीं आती’
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में समय लगता है। इसी कारण हमने रैपिड टेस्ट पर जोर दिया था। उस समय मैंने प्रधानमंत्री जी के साथ वीडियो कांफ्रेंस में अनुरोध किया था कि पीपीई, मास्क, वेंटिलेटर, रैपिड एवं पीसीआर टेस्ट किट आदि की केन्द्रीयकृत खरीद हो, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। अब रैपिड टेस्ट के नतीजों पर देशभर में जो संदेह का वातावरण बना है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उस समय हमारे सुझावों को मान लिया जाता तो आज आईसीएमआर को रैपिड टेस्ट स्थगित करने की नौबत नहीं आती।
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