नई दिल्ली. हम 32 रुपये किलो आलू (Potato price) देने के लिए कब से तैयार हैं, लेकिन सरकार है कि भूटान (Bhutan) से इंपोर्ट कर रही है. इंपोर्ट करने में अधिकारियों को कमीशन मिलता है. हम तो कमीशन दे नहीं पाएंगे. हमें सरकार नगद पैसा दे और आलू ले ले. किसान 60 रुपये किलो नहीं बेच रहे हैं. दाम तो मंडी में बैठे आढती और व्यापारी डबल कर दे रहे हैं. उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. यह बात आलू उत्पादक किसान समिति आगरा मंडल के महासचिव आमिर चौधरी ने कही है.
चौधरी ने कहा, यूपी देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है और यूपी में आगरा (Agra) व फिरोजाबाद का इलाका इसके उत्पादन का गढ़ है. हम बड़े उत्पादकों में शुमार हैं इसके बावजूद दाम इतना बढ़ गया है तो इसके पीछे सप्लाई चेन की गड़बड़ियां हैं. सरकार उन लोगों पर एक्शन ले जो डबल दाम करके बेच रहे हैं. किसानों को तंग न करे. आलू की कमी नहीं है. बस सप्लाई चेन (Supply chain) की गड़बड़ियों को सुधारने की जरूरत है. हालांकि, कुछ अधिकारी और नेता ऐसा होने देना नहीं चाहते क्योंकि इंपोर्ट-एक्सपोर्ट (Import-Export) के खेल में उनकी कमीशनखोरी खत्म हो जाएगी. चौधरी इन दिनों अपने संगठन की ओर से 30 रुपये किलो के रेट पर आगरा में जगह-जगह गाड़ी भेजकर आलू बिकवा रहे हैं. यह काम खुद सरकार भी कर सकती है.

आगरा में 30 रुपये किलो आलू बेच रहे हैं किसान तो फिर कौन डबल कर दे रहा दाम?
सरकार के इस फैसले पर आपत्ति
आलू के दाम चढ़े तो सरकार ने कोल्ड स्टोर खाली करने का वक्त 30 नवंबर से घटाकर 31 अक्टूबर कर दिया. चौधरी को इस पर आपत्ति है. उनका कहना है कि कोल्ड स्टोर संचालकों ने किसानों से भाड़ा 15 फरवरी से 30 नवंबर तक का ले लिया है. सरकार एक महीने का भाड़ा भी कम करवा दे. कोल्ड स्टोर एक महीने पहले ही बंद करना था तो जुलाई में ही बता देते.
चौधरी का कहना है कि किसान 30-32 रुपये किलो में साल भर मेहनत करके बेच रहा है तो आढ़ती और मंडी के व्यापारी दो दिन में दाम दोगुना करके जनता को लूट रहे हैं. सरकार उन पर अंकुश न लगाकर उल्टे किसानों को परेशान कर रही है. मुझे तो हैरानी इस बात की है कि सरकार इतना बड़ा इलेक्शन करवा सकती है लेकिन सस्ते आलू का वितरण नहीं. विदेशों से आयातित आलू भी करीब 28-30 रुपये प्रति किलो तक पड़ेगा.

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