मुश्किलों ने ली परीक्षा, लेकिन संयम से सब संभाला


बेटी के साथ नर्स अमनदीप।

कैंट के सिविल हाॅस्पिटल में बताैर नर्स कार्यरत अमनदीप काैर की काेविड- आइसाेलेशन वाॅर्ड में ड्यूटी लगी हुई है। पिछले 3 सालाें से वे यहां बताैर नर्स कार्यरत है। काेविड वार्ड में ड्यूटी के चलते वे अपनी 3 साल की बेटी से 15-15 दिन दूर रहती थी। जब बेटी जसनुरकाैर मां से मिलने की जिद्द करती ताे उसके पापा गुरप्रीत सिंह सिटी के पास गांव मानकपुर से बेटी काे मां काे दिखाने के लिए लाया करते थे।

बेटी मां काे दूर से ही देखकर चुप हाे जाया करती। नर्स अमनदीप काैर ने बताया कि जब भी 15 दिन के बाद बेटी से मिलने जाना हाेता ताे हर बार काेविड टेस्ट करवाकर रिपाेर्ट आने के बाद ही उससे मिलने जाती थी। बेटी काे स्कूल की पढ़ाई भी वीडियाे काॅल के जरिए करवाती थी। लगभग 3-4 महीने इसी तरह से मैनेज करती रही। अब भी अमनदीप की ड्यूटी आइसाेलेशन वाॅर्ड में ही लगी हुई है। ऐसे में हाॅस्पिटल में ही अलग से कपड़े व जूते रखे हुए हैं। घर जाने से पहले कपड़े बदलकर ही जाती हैं।

ड्यूटी के साथ डॉक्टर पत्नी की देखभाल : डॉ. संजीव
कैंट के सिविल अस्पताल में डाॅ. संजीव गाेयल पिछले साढ़े तीन साल से फिजिशियन के पद पर कार्यरत हैं। आइसाेलेशन वाॅर्ड में उनकी ड्यूटी लगी हुई है। डाॅ. गाेयल ने बताया कि पत्नी आदेश मेडिकल में गाइनाॅकाेलाॅजिस्ट हैं। काेराेना जब पीक पर था तब साढ़े 5 साल के बेटे की देखभाल के लिए घर पर ही थी। उस दाैरान उसे चेस्ट में तेज दर्द की प्राॅबल्म हाे गई।

उस समय हाॅस्पिटल की ड्यूटी व वाइफ दाेनाें काे देखना हाेता था। तब डर भी हुआ कि कई मेरी वजह से वाइफ काे काेराेना न हाे गया। उस समय ड्यूटी और वाइफ की देखभाल दाेनाें एक साथ चल रही थी। घर जाकर दवाई देना और इमरजेंसी में हाॅस्पिटल आकर मरीजाें काे देखना दाेनाें ड्यूटी एक साथ की। उस समय ताे मुझे बेटे से भी दूर रहना पड़ता था। घर जाकर अलग कमरे में रहता था। बेटा मिलना चाहता ताे मिल नहीं पाता था। अब भी आइसाेलेशन वाॅर्ड में ड्यूटी कर रहे हैं।

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