राजनाथ सिंह ने कहा- सरकार कृषि कानून रद्द करने को है तैयार, माननी होगी यह शर्त








नई दिल्ली: कृषि कानून को रद्द करने की मांग के साथ किसान पिछले 34 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हुई लेकिन सब विफल।

दरअसल, जहां एक तरफ किसान इस कानून को रद्द करने से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं, तो वहीं सरकार भी अड़ी हुई है और अब तो ऐसा लगता है कि सरकार कानूनों को वापस न लेने का फैसला कर चुकी है। आपको बता दें कि किसानों और सरकार के बीच अब तक 5 से 6 स्तर की बात हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हो पाई है।

गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 35वें दिन भी जारी है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि “किसान कम से कम 2 साल इस कानून को उपयोग करके देखे कि ये कानून कितना उपयोगी है फिर अगर आपको लगता है कि कानून में संशोधन करने की जरूरत है तो हमारी सरकार संशोधन करने के लिए तैयार है और आज भी किसान बातचीत करे, उन्हें लगता है कि इसमें संशोधन की आवश्यकता है तो हम तैयार हैं”।

रक्षा मंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि “कृषि संबंधी ये जो तीन कानून बने हैं ये किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही बनाएंगे हैं। पिछले सरकारों की तुलना में हमने न्यूनतम समर्थन मूल्य काफी बढ़ाई हैं। इस तीनों कानूनों के माध्यम से हमने पूरी कोशिश की है कि किसानों की आमदनी दो-तीन गुना बढ़े”।

जानकारी के लिए बता दें कि किसानों का कहना है कि जब तक कानून हटेगा नहीं तब तक वह आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। इसपर रक्षा मंत्री का कहना है कि “बातचीत हो रही है, मुझे विश्वास है इसका समाधान निकलेगा। मैं किसानों से विनती करता हूं। मैंने इस कानूनों को देखा है, मैं भी कृषि मंत्री रह चुका हूं इसलिए मैं कहता हूं कि ये कानून किसानों के हित में है”।

मालूम हो कि दिल्ली के सभी बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान इस कड़ाके की ठंड में 1 महीने से भी ज्यादा से डटे हुए हैं और सभी किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। साथ ही बता दें कि इनमें से ज्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा से आए हैं।

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