बेटी के रिश्ते पर न आए आंच, खुद खरीद कर लगवाई अम्बेडकर प्रतिमा





बेटी की शादी जैसे-तैसे कर्ज लेकर की। बेटी विदा हुई तो बारातियों पर गांव के अम्बेडकर प्रतिमा तोड़ने का शक गहराया। उसी रात वह प्रतिमा टूटी थी जिस रात बारात आई थी। बेटी की नई-नवेली शादी और उसके घर पुलिस जाकर बारातियों के बारे में पूछ-ताछ करने की पिता को चिंता सताने लगी। बेटी-दामाद की इज्जत पर कोई आंच न आए और पुलिस उनके घर न जाए इसके लिए पिता ने कर्ज लेकर गांव में अम्बेडकर प्रतिमा लगवाया। यह घटना लाहीडाड़ी गांव की है।

 

गोला थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत लाहीडाड़ी के निवासी राधेश्याम की छोटी बेटी की शादी शुक्रवार थी। बारात गांव के मिडिल स्कूल पर रुकी थी। जहां बारात ठहरी थी उससे कुछ दूरी पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगी थी। रात में किसी अराजक तत्व ने छति पहुंचा दी। इस घटना की जानकारी जब गांव और अगल-बगल के लोगों को हुई तो तनाव फैल गया। गांव पहुंच इंस्पेक्टर गोला संतोष कुमार सिंह ने हालात सामान्य कराया। गांव के लोगों को समझाते हुए जल्द ही दूसरी प्रतिमा लगवाने का भरोसा दिया। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी।

 

उधर, गांव लोगों ने राधेश्याम मौर्य को बताया कि बारात में आए युवकों ने ही यह प्रतिमा तोड़ी है। पुलिस अब बारातियों के घर जाएगी और पूछताछ करेगी। राधेश्याम के समधी और दामाद से भी इस मामले में पूछताछ होगी। यह सुनकर राधेश्याम परेशान हो गए। उनकी चिंता इस बात की थी कि पुलिस की पूछताछ में कहीं उनकी बेटी के रिश्ते पर न आंच आ जाए। राधेश्याम से लोगों ने कहा कि अगर वे खुद प्रतिमा लगवा दें तो शायद इस पचड़े से उनके समधी का परिवार बच जाए। समधी की बदनामी और बेटी के रिश्ते पर आंच न आए इसके लिए राधेश्याम तैयार हो गए। राधेश्याम ने 40 हजार रुपये कर्ज लेकर लखनऊ से अम्बेडकर की प्रतिमा मंगवाई। राधेश्याम ने बताया कि नए रिश्तेदार के वहां पुलिस पूछताछ करने जाए इससे बढ़िया उन्होंने 40 हजार रुपये खर्च करना ही उचित समझा। बांसगांव तहसीलदार वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि गांव वालों की सहयोग से प्रतिमा पुन: स्थापित किया गया है।

 

ग्रामीण कर रहे राधेश्याम की मदद

प्रतिमा टूटने पर अपने पास से 40 हजार देने की बात जब गांव और अगल-बगल के गांव के कुछ लोगों हुई तो वे मदद के लिए आगे आए। काफी लोगों ने राधेश्याम के घर जाकर उन्हें मदद दी जिससे उनका कर्ज का भार कम हो सके। बताया जा रहा है कि जानीपुर गांव के प्रधान राजेश सिंह 'राजन' ने 5 हजार तो वहीं नर्रै गांव के संतोष चन्द ने 5 हजार रुपये देने की बात कही।

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